रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज ‘झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद’ की एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई की समीक्षा करना था। गहन विचार-विमर्श और कानूनी पहलुओं को परखने के बाद, कुल 15 कैदियों के मामलों में से 6 कैदियों को रिहा करने पर सहमति बनी है।

सख्त जांच के बाद मिली आजादी

इन कैदियों की रिहाई का निर्णय अचानक नहीं लिया गया। परिषद ने संबंधित अदालतों के मंतव्य, जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP), जेल अधीक्षकों और प्रोबेशन पदाधिकारियों की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया। कैदियों के जेल के भीतर व्यवहार और उनके सुधार की संभावनाओं को देखते हुए ही अंतिम सूची तैयार की गई।

निगरानी के लिए बनेगा ‘डेटा बेस’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केवल रिहाई के आदेश ही नहीं दिए, बल्कि भविष्य की सुरक्षा के लिए एक ठोस निर्देश भी जारी किया। उन्होंने कहा कि जो भी कैदी रिहा किए जा रहे हैं, उनका एक विस्तृत डिजिटल डेटा बेस तैयार किया जाए। जेल से बाहर आने के बाद ये कैदी समाज में किस तरह रह रहे हैं, उनकी गतिविधियों की निरंतर ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। सीएम का मानना है कि इससे न केवल अपराध पर नियंत्रण रहेगा, बल्कि पूर्व कैदियों को दोबारा गलत राह पर जाने से रोका जा सकेगा।

मुख्यधारा से जुड़ाव और सामाजिक जागरूकता

सरकार की योजना इन कैदियों को लावारिस छोड़ने की नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रिहा होने वाले कैदियों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

इसके साथ ही, बैठक के दौरान सीएम ने एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में ‘डायन बिसाही’ जैसी कुप्रथाएं और हिंसा की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि अंधविश्वास के कारण होने वाले अपराधों पर लगाम लग सके।

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह विभाग की अपर सचिव वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा और विधि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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