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Health Desk: डायबिटीज (मधुमेह) अब केवल उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं रही, बल्कि अस्वस्थ खानपान और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण यह युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शरीर में बढ़ता शुगर लेवल केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिल के रोगों, किडनी फेलियर, नर्व डैमेज और अंधापन जैसी घातक स्थितियों का मुख्य द्वार है।
हैरान करने वाले आंकड़े: एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्थिति बेहद चिंताजनक है। 45 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 57,810 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि इस आयु वर्ग के करीब 20 प्रतिशत लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हर 10 में से 4 मरीजों को यह पता ही नहीं होता कि वे इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं। यह स्टडी बताती है कि शहरी क्षेत्रों में खराब लाइफस्टाइल और मानसिक तनाव के कारण इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
समझें डायबिटीज के प्रकार और खतरा: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है:
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टाइप 1: इसमें शरीर इंसुलिन बनाना पूरी तरह बंद कर देता है।
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टाइप 2: इसमें शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता (यह सबसे सामान्य है)।
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गर्भावधि (Gestational): यह महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होती है।
इंसुलिन वह हार्मोन है जो खून की शुगर को ऊर्जा में बदलता है। जब इंसुलिन सही से काम नहीं करता, तो शुगर खून में जमा होने लगती है। यही जमा हुई शुगर आगे चलकर कैंसर, डिमेंशिया (याददाश्त की कमी) और सुनने की शक्ति कम होने जैसी परेशानियों का कारण बनती है।
बचाव ही सबसे बड़ा समाधान: डॉक्टरों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी से इस “साइलेंट किलर” से बचा जा सकता है। संतुलित आहार, रोजाना नियमित व्यायाम और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराना अनिवार्य है। यदि आप मोटापे या तनाव से जूझ रहे हैं, तो आपको अपनी जीवनशैली में तुरंत सुधार करने की जरूरत है।
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