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India News: दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में सर्दी के दौरान कोहरा एयर ट्रैफिक की सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है। इसी वजह से DGCA ने अब एक नई, काफी सख्त व्यवस्था लागू कर दी है, ताकि टेक ऑफ और लैंडिंग के समय होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सके। नए नियमों में उड़ान को तीन अलग श्रेणियों में बांटा गया है—कैटेगरी 1, कैटेगरी 2 और कैटेगरी 3। जैसे-जैसे दृश्यता कम होती जाएगी, नियम और कठोर होते जाएंगे।
550 मीटर से 100 मीटर तक हर स्तर पर अलग मानक
कैटेगरी 1 तब लागू होगी जब दृश्यता 550 मीटर के आसपास हो। कैटेगरी 2 में यह सीमा 300 मीटर तक घट जाती है और कैटेगरी 3 में दृश्यता 100 मीटर या उससे भी कम रहती है। इन परिस्थितियों में विमान तभी उड़ान भर सकेगा, जब पांच चरणों की तकनीकी जांच पूरी तरह पास हो। DGCA हर विमान के ऑटो-पायलट, सेंसर और लैंडिंग सिस्टम को अलग-अलग परखेगा, और तभी उड़ान की अनुमति दी जाएगी। पहले अनुमति पूरे बेड़े के लिए एक साथ मिलती थी, अब हर विमान और हर पायलट को व्यक्तिगत अप्रूवल लेना होगा।
पायलटों को फिर से ट्रेनिंग लेनी होगी
कोहरे में उड़ान भरने वाले पायलटों को अब खास प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें सिम्युलेटर पर कम दृश्यता में लैंडिंग, ऑटो-लैंडिंग सिस्टम की समझ और आपात स्थिति में ‘गो-अराउंड’ जैसे अभ्यास शामिल होंगे। सभी ILS, रेडियो ऑल्टीमीटर और ऑटो-पायलट सिस्टम का हर छह महीने में परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, यदि कोई विमान लगातार 30 दिनों तक कैटेगरी 2 या 3 में उड़ान नहीं करता, तो उसे दोबारा उड़ान भरने से पहले ग्राउंड टेस्ट या टेस्ट फ्लाइट पास करनी होगी।
हर विमान के लिए अलग मैनुअल अनिवार्य
एयरलाइनों को भी नए नियमों के तहत काफी बदलाव करने होंगे। अब उन्हें हर एयरक्राफ्ट के लिए अलग कैटेगरी मैनुअल तैयार करना होगा। DGCA का मानना है कि यह नई व्यवस्था एयरपोर्ट, एयरलाइंस और पायलट—सभी को अधिक जिम्मेदार बनाएगी और घने कोहरे में होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी कम करेगी।
फॉग सीजन में उड़ानों की देरी अब कम होने की उम्मीद
हर साल सैकड़ों उड़ानें कोहरे के कारण देर होती हैं या रद्द करनी पड़ती हैं। DGCA को उम्मीद है कि इस नए नियम से ऐसी परेशानियों में कमी आएगी और ऑपरेटर्स केवल वही उड़ानें चलाएँगे जिनके विमान और पायलट पूरी तरह तैयार हों।

