Health Desk: मौसम में अचानक आए उतार-चढ़ाव की वजह से इन दिनों डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। आमतौर पर डेंगू का बुखार 7 से 10 दिनों तक बना रहता है, लेकिन ‘डेंगू हेमरेजिक फीवर’ की स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है। इसमें खून के प्लेटलेट्स और सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या तेजी से गिरने लगती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरी दवाइयों के साथ-साथ यदि आयुर्वेदिक उपचार को अपनाया जाए, तो मरीज बहुत जल्दी स्वस्थ हो सकता है।

आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, कद्दू की सब्जी से कहीं ज्यादा फायदेमंद उसका रस होता है। कद्दू का रस न केवल शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को भी जबरदस्त तरीके से बढ़ा देता है। हालांकि, इम्यूनिटी रातों-रात नहीं बढ़ती, इसके लिए नियमित दिनचर्या का पालन करना पड़ता है। कद्दू के रस के अलावा बकरी का दूध, पपीते की पत्तियां और गिलोय का रस भी गिरते हुए प्लेटलेट्स को सामान्य करने में रामबाण साबित होते हैं। बकरी का दूध सुपाच्य होता है और शरीर से बुखार निकालने में बेहद कारगर माना गया है।

हैरानी की बात यह है कि कद्दू का रस सिर्फ डेंगू ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी वरदान है। यह धमनियों की दीवारों को सख्त होने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण खून की नलियों को साफ रखने में मदद करते हैं। साथ ही, यह पाचन शक्ति को बढ़ाकर कब्ज और दस्त जैसी समस्याओं से निजात दिलाता है।

इतना ही नहीं, किडनी में पथरी की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी कद्दू का रस किसी औषधि से कम नहीं है। यदि 10 दिनों तक लगातार दिन में तीन बार आधा गिलास कद्दू का रस पिया जाए, तो पथरी की समस्या में सुधार होने लगता है। विटामिन सी और ई से भरपूर होने के कारण यह त्वचा को चमकदार बनाता है और झुर्रियों को दूर रखता है। कुल मिलाकर, यह साधारण सी दिखने वाली सब्जी गंभीर बीमारियों से लड़ने में सबसे बड़ी मददगार साबित हो सकती है।

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