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Ranchi News : झारखंड छात्र संघ ने प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पढ़ने वाले उर्दू भाषी छात्रों के लिए उर्दू लिपि में किताबें उपलब्ध कराने की मांग को लेकर जोरदार पहल की है। इसी सिलसिले में छात्र संघ का एक प्रतिनिधिमंडल JCERT (झारखंड एजुकेशन काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) के उपनिदेशक प्रदीप कुमार चौबे से मिला और सरकार, सचिव एवं निदेशक के नाम एक मांग पत्र सौंपा।
छात्र संघ के अध्यक्ष एस. अली ने बताया कि JCERT द्वारा जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की लिपि में किताबों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन उर्दू लिपि में पुस्तकों का निर्माण नहीं हो रहा। यह न केवल उर्दू भाषी छात्रों और शिक्षकों के साथ उपेक्षा है, बल्कि राज्य की द्वितीय राजभाषा उर्दू के साथ भेदभाव भी है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में उर्दू विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य मातृभाषा में शिक्षा देना है। राज्य में 6 लाख से अधिक उर्दू भाषी छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा उर्दू लिपि में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल रहा। जबकि झारखंड सरकार के संकल्प संख्या 1278 (वर्ष 2003), आरटीई अधिनियम 2009 और नई शिक्षा नीति 2020 स्पष्ट रूप से मातृभाषा में शिक्षा देने का निर्देश देते हैं।
एस. अली ने यह भी कहा कि JCERT को हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा अन्य सभी विषयों की किताबें उर्दू लिपि में तैयार करवाकर उर्दू भाषी छात्रों तक पहुंचानी चाहिए, ताकि वे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहें।
उप निदेशक प्रदीप कुमार चौबे ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे को वरीय अधिकारियों के समक्ष रखेंगे और उर्दू लिपि में किताबों का निर्माण करवाने का प्रयास करेंगे।
इस मौके पर केंद्रीय संगठन प्रभारी जियाउद्दीन अंसारी, केंद्रीय सचिव नौशाद आलम, केंद्रीय उपसचिव हरीश आलम, मौलाना मनोवर हुसैन, प्रखंड अध्यक्ष रातु मोहम्मद सिद्दिक अंसारी, ग्रामीण जिला उपसचिव आसिफ अंसारी, प्रखंड अध्यक्ष रातु झारखंड छात्र संघ अब्दुल बारी, अफसर अंसारी, इमरान जिलानी, इरशाद इमाम, मोहम्मद गुलजार और वारिस अंसारी मौजूद थे।

