रांची: झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपनी छवि धूमिल करने और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाने वाली मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने रांची के एक स्थानीय यूट्यूब चैनल द्वारा चलाए जा रहे ‘मीडिया ट्रायल’ को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए 10 करोड़ रुपये का लीगल नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
मंत्री डॉ. अंसारी की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने 23 अप्रैल 2026 को यह बाइंडिंग लीगल नोटिस भेजा। मंत्री का आरोप है कि उक्त चैनल ने न केवल उनके खिलाफ भ्रामक सामग्री प्रसारित की, बल्कि खबरों में सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल कर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश भी की। शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित एजेंडे के तहत किया गया चरित्र-हनन है।
नोटिस में तीन कड़े अल्टीमेटम
मंत्री ने चैनल के सामने झुकने के बजाय तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं:
- यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से विवादित कंटेंट को तत्काल हटाना होगा।
- डॉ. अंसारी से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगनी होगी।
- यदि निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं किया गया, तो 10 करोड़ रुपये का हर्जाना देना होगा।
संवैधानिक अधिकारों की दुहाई
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि इस प्रकार की खबरों से उन्हें न केवल मानसिक पीड़ा हुई है, बल्कि उनके सार्वजनिक सम्मान को भी ठेस पहुँची है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा, “अभिव्यक्ति की आजादी का हम सम्मान करते हैं, लेकिन झूठ फैलाकर समाज को बांटने और किसी की प्रतिष्ठा से खेलने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।”
मुख्यमंत्री से की बड़ी सिफारिश
सिर्फ कानूनी कार्रवाई ही नहीं, डॉ. अंसारी ने इस मामले में प्रशासनिक सख्ती की भी मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि ऐसे मीडिया संस्थानों को दिए जा रहे सरकारी विज्ञापन तुरंत रोके जाएं और जनसंपर्क विभाग (IPRD) में उनका पंजीकरण रद्द किया जाए। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि बिहार से संचालित कुछ यूट्यूब चैनल सुनियोजित तरीके से झारखंड की सरकार और यहाँ के जनप्रतिनिधियों की छवि खराब करने में जुटे हैं।



