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रांची: राजधानी के वार्ड संख्या 48, बड़ा घाघरा स्थित नगर निगम की बहुमूल्य भूमि को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए रांची नगर निगम के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस न्यायिक जीत के साथ ही निगम प्रशासन ने अपनी इस जमीन को सुरक्षित करने और जनहित में इसके उपयोग की तैयारी युद्धस्तर पर शुरू कर दी है।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे अपर प्रशासक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ठीक बाद, 26 फरवरी 2026 को अपर प्रशासक संजय कुमार ने अधिकारियों की टीम के साथ बड़ा घाघरा स्थित लगभग 2 एकड़ 80 डिसमिल जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भू-संपदा और स्वच्छता शाखा के अधिकारियों को इस बेशकीमती जमीन की तुरंत घेराबंदी (बाउंड्री वॉल) करने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में दोबारा कोई इस पर कब्जा न कर सके।
अवैध कब्जाधारियों को ‘अंतिम चेतावनी’
निरीक्षण के दौरान मौके पर अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों को अपर प्रशासक ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग अवैध तरीके से जमीन पर काबिज हैं, वे जल्द से जल्द स्वेच्छा से जमीन खाली कर दें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो निगम प्रशासन बलपूर्वक जमीन खाली कराएगा और कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगा।
क्या है निगम का मास्टर प्लान
नगर निगम इस जमीन का उपयोग शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुधारने के लिए करने वाला है:
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बड़ा घाघरा: यहां 50 टन प्रति दिन (TPD) क्षमता का एक आधुनिक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) केंद्र बनाने का प्रस्ताव है।
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खादगढ़ा: इसके साथ ही खादगढ़ा स्थित निगम की जमीन का भी निरीक्षण किया गया, जहां 40 टन प्रति दिन (TPD) क्षमता का प्लांट प्रस्तावित है।
वैज्ञानिक तरीके से होगा कचरे का निपटान
निगम प्रशासन के अनुसार, इन MRF केंद्रों की स्थापना से रांची में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई मजबूती मिलेगी। यहां कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा और रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। इससे न केवल शहर का कचरा कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित होगा। इस मौके पर सहायक प्रशासक सहित भू-संपदा और स्वच्छता शाखा के कई संबंधित कर्मी उपस्थित थे।
MRF केंद्र : कचरे से कंचन बनाने का आधुनिक मॉडल
1. कचरे का वैज्ञानिक पृथक्करण (Sorting)
अक्सर घरों से निकलने वाला कचरा मिला-जुला होता है। MRF केंद्र पर पहुँचते ही इसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है:
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सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, कार्डबोर्ड, कांच और धातुओं को अलग किया जाता है।
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रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री: उन वस्तुओं की पहचान की जाती है जिन्हें दोबारा इस्तेमाल के लिए प्रोसेस किया जा सकता है।
2. कचरे का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (Processing)
मशीनों और प्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से कचरे को प्रोसेस किया जाता है:
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बेलिंग (Baling): अलग किए गए प्लास्टिक और कागज को बड़ी मशीनों से दबाकर ‘बंडल’ बनाया जाता है, ताकि उन्हें रीसाइक्लिंग यूनिट्स तक भेजना आसान हो।
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जैविक कचरा: गीले कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया को गति दी जाती है।
3. कचरे के डंपिंग यार्ड पर बोझ कम होना
वर्तमान में शहर का सारा कचरा सीधे डंपिंग यार्ड (Landfill) में चला जाता है। MRF केंद्रों के सक्रिय होने से:
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लगभग 70% से 80% कचरा रीसायकल होकर वापस बाजार में पहुँच जाएगा।
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डंपिंग यार्ड में केवल वही कचरा जाएगा जिसका कोई उपयोग संभव नहीं है।
रांची को होने वाले बड़े फायदे
| विशेषता | विवरण |
| क्षमता | बड़ा घाघरा (50 TPD) और खादगढ़ा (40 TPD) मिलकर रोज़ाना 90 टन कचरा प्रोसेस करेंगे। |
| पर्यावरण | कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से मिट्टी और भूजल प्रदूषण में कमी आएगी। |
| रोजगार | इन केंद्रों के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर कई लोगों को रोजगार मिलेगा। |
| राजस्व | रीसायकल योग्य सामग्री को बेचकर नगर निगम अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेगा। |

