India News: हाल ही में केरल में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस पार्टी के लिए राहत की खबर लाई है, जिसके बाद राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अब देश की सबसे पुरानी पार्टी के ‘अच्छे दिन’ आने वाले हैं?
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने कुल 1,199 स्थानीय निकायों में से चार निगमों, 54 नगरपालिकाओं, सात जिला पंचायतों, 79 प्रखंड पंचायतों और 505 ग्राम पंचायतों में शानदार जीत हासिल की है। इस चुनाव को आगामी केरल विधानसभा चुनाव के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा था। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले महीने बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था, जहां उसे 243 में से सिर्फ छह सीटें मिली थीं।
केरल में वापसी की उम्मीद, असम बना सबसे बड़ा दांव
केरल की इस जीत के बाद, नया साल कांग्रेस के लिए बेहतर साबित होने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, अगले साल मार्च-अप्रैल में केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में फिलहाल कांग्रेस कहीं भी सत्ता में नहीं है, इसलिए उसके पास खोने के लिए कम और पाने के लिए बहुत कुछ है।
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ बीते एक दशक से सत्ता से बाहर है, लेकिन निकाय चुनाव के प्रदर्शन ने राज्य की सत्ता में वापसी की उम्मीदें जगा दी हैं। तमिलनाडु में कांग्रेस, डीएमके की सहयोगी है और यहाँ विपक्षी गठबंधन का प्रदर्शन पिछले लोकसभा चुनाव में शानदार रहा था।
पूर्वी भारत में, पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच है, जहाँ कांग्रेस मुख्य दावेदार की भूमिका में नहीं है। हालाँकि, असम कांग्रेस के लिए सबसे अहम राज्य बना हुआ है। यहाँ पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रही है और फिलहाल बीजेपी के साथ उसकी कांटे की लड़ाई है। 126 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत गठबंधन के पास 50 सीटें हैं, जबकि एनडीए के पास 75 सीटें हैं। असम में मजबूत संगठन और जनाधार होने के कारण, कांग्रेस को यहां सत्ता में वापसी की सबसे बड़ी उम्मीद है।



