रांची: झारखंड की समृद्ध जनजातीय विरासत को आधुनिक तकनीक और डिजिटल भविष्य से जोड़ने की दिशा में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा ने एक अनूठी पहल की है। शुक्रवार से संस्थान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “जड़ों से नवजागरण : झारखंड में जनजातीय विरासत, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता को जोड़ने की पहल” का शानदार शुभारंभ हुआ। 6 से 8 मार्च 2026 तक चलने वाली इस कार्यशाला में कला, संस्कृति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के समन्वय पर गहन मंथन किया जा रहा है।
सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करें युवा : मधु मंसूरी
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पद्मश्री से सम्मानित मशहूर लोकगायक मधु मंसूरी ‘हंसमुख’ ने अपनी चिरपरिचित शैली में युवाओं का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन मनुष्य को अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमारी जनजातीय परंपराएं ज्ञान का अटूट भंडार हैं।
डिजिटल तकनीक से सशक्त होगी जनजातीय विरासत
विशिष्ट अतिथि और कला-संस्कृति विभाग के निदेशक आसिफ अकरम ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जनजातीय ज्ञान और कला को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल उद्यमिता से जोड़ना वक्त की जरूरत है। इससे न केवल हमारी अमूर्त धरोहरें सुरक्षित रहेंगी, बल्कि जनजातीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
सिर्फ भाषण नहीं, प्रयोगों का संगम
यह कार्यशाला केवल संवाद तक सीमित नहीं है। इसमें छात्र और शोधकर्ता व्यावहारिक सत्रों के जरिए सोहराय पेंटिंग की बारीकियां, मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, पारंपरिक मास्क निर्माण और जनजातीय व्यंजनों की खूबियों को जान रहे हैं। उद्घाटन सत्र का समापन पारंपरिक झूमर नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर को सांस्कृतिक रंग में सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर बीआईटी मेसरा के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय झा सहित कई जाने-माने शिक्षाविद और कलाकार उपस्थित रहे, जो अगले दो दिनों तक जनजातीय नवाचार और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।



