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Ranchi: झारखंड की प्रगति को वैश्विक नक्शे पर उकेरने के बाद सीएम हेमंत सोरेन मंगलवार को रांची लौट आए हैं। 17 जनवरी को दिल्ली के रास्ते दावोस के लिए रवाना हुए सीएम ने पिछले 10 दिनों में स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम (UK) में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उनके साथ विधायक कल्पना सोरेन और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भी मौजूद रही। रांची एयरपोर्ट पर उनकी वापसी के साथ ही राज्य में नए निवेश और विकास की नई उम्मीदें जाग गई हैं।
दावोस में ‘ब्रांड झारखंड’ की धूम: ₹11,000 करोड़ के निवेश की राह हुई आसान
स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक में सीएम ने झारखंड को केवल एक ‘खनन राज्य’ के रूप में नहीं, बल्कि एक उभरते हुए ‘औद्योगिक और आईटी हब’ के रूप में पेश किया। दुनिया भर के दिग्गज उद्योगपतियों और विशेषज्ञों के साथ हुई मुलाकातों का नतीजा यह रहा कि राज्य में करीब 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की संभावना बनी है। इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए सरकार जल्द ही एक ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ का गठन करने जा रही है।
शिक्षा और तकनीक पर जोर: ऑक्सफोर्ड और इंपीरियल कॉलेज का दौरा
दौरे के दूसरे चरण में सीएम लंदन पहुंचे, जहां उन्होंने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में राज्य की साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। इंपीरियल कॉलेज लंदन में उन्होंने ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ और वैल्यू एडेड इंडस्ट्री पर विशेषज्ञों से बात की। एक भावुक और ऐतिहासिक पल तब आया जब सीएम ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सेंट जॉन्स कॉलेज में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेखों का अवलोकन किया। यह झारखंड की अस्मिता और गौरव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम रहा।
झारखंड के लिए नई कार्ययोजना तैयार
सीएम के साथ-साथ नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनु के नेतृत्व में गई एक अन्य टीम ने भी यूके में विभिन्न सेमिनारों और बैठकों में हिस्सा लिया। सीएम की वापसी के बाद अब इन समझौतों और प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए बैठकों का दौर शुरू होगा। सरकार का लक्ष्य झारखंड को हरित तकनीक (Green Tech) और अत्याधुनिक उद्योगों के अनुकूल बनाना है, ताकि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
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