India News: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शुक्रवार को बस्तर जिले के जगदलपुर में बड़ा मोड़ आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के समक्ष 200 से अधिक माओवादियों ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। इन माओवादियों में उत्तर-पश्चिम उप-क्षेत्रीय प्रभारी रूपेश जैसे उच्च पदस्थ नेता भी शामिल हैं, जिनके पार्टी छोड़ने से माओवादी नेतृत्व को तगड़ा झटका लगा है।
रूपेश अपने अन्य साथियों के साथ गुरुवार को बीजापुर पुलिस मुख्यालय पहुंचे और समर्पण किया, जिसके बाद अंतिम औपचारिकता आज जगदलपुर स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में पूरी की जाएगी। इस ऐतिहासिक समर्पण को सरकार ने क्षेत्र में शांति, विकास और विश्वास निर्माण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना है।
विकास, शिक्षा और विश्वास की रणनीति सफल
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में संगठन के कई शीर्ष नेता
अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो गया है, जिससे उत्तरी बस्तर में दशकों से जारी लाल आतंक का लगभग अंत हो गया है। अब नक्सल गतिविधियां मुख्य रूप से दक्षिणी बस्तर के कुछ इलाकों तक सीमित रह गई हैं। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में संगठन के कई शीर्ष नेता भी शामिल हैं। इनमें एक केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम), चार दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (डीकेएसजेडसी) सदस्य, एक क्षेत्रीय समिति सदस्य, 21 संभागीय समिति सदस्य (डीवीसीएम), 61 क्षेत्रीय समिति सदस्य (एसीएम), 98 पार्टी सदस्य और 22 पीएलजीए/आरपीसी व अन्य कार्यकर्ता शामिल हैं।
नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान भारी मात्रा में हथियार पुलिस को सौंपे। इन हथियारों में 19 एके-47 राइफलें, 17 एसएलआर राइफलें, 23 इंसास राइफलें, एक इंसास एलएमजी, 36 .303 राइफलें, चार कार्बाइन, 11 बीजीएल लांचर, 41 बारह-बोर और सिंगल-शॉट बंदूकें तथा एक पिस्तौल शामिल हैं। इस बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण से माओवादी नेटवर्क की रीढ़ कमजोर पड़ने की उम्मीद है। आत्मसमर्पण करने वाले शीर्ष माओवादी नेताओं में रूपेश उर्फ सतीश (केंद्रीय समिति सदस्य), भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम, धन्नू वेट्टी उर्फ संटू और रतन एलम जैसे वरिष्ठ कैडर शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालिया आत्मसमर्पण को इस लक्ष्य की दिशा में निर्णायक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नक्सलियों के हौसले लगातार टूट रहे हैं और सरकार की पुनर्वास नीति उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।
केंद्र का कड़ा संदेश और मिशन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया है कि हथियार उठाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा और समर्थकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय का उद्देश्य 2026 तक नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करना है। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इस लक्ष्य को लेकर पूरी शक्ति से जुटी है।



