Chatra News: चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड के दंतार गांव में गुरुवार को उस समय हंगामा मच गया, जब प्रशासनिक टीम एक झोलाछाप प्रैक्टिशनर की क्लीनिक सील करने पहुंची। एसडीओ जहूर आलम को सूचना मिली थी कि गांव के मुख्य चौक पर चंदन नामक व्यक्ति अवैध नर्सिंग होम चला रहा है। इसके बाद एसडीओ, बीडीओ निखिल गौरव कच्छप, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केके साहा और पुलिस बल मौके पर पहुंचे।
जैसे ही टीम क्लीनिक पर पहुंची, वहां 6 से 7 मरीज मौजूद मिले। पुलिस को देखकर सभी मरीज भाग निकले। इसी बीच क्लीनिक संचालक चंदन भी फरार होने की कोशिश में था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। कार्रवाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और जमकर विरोध करने लगे।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि गुस्साए ग्रामीणों से बचने के लिए अधिकारियों को क्लीनिक के छत की बालकनी में शरण लेनी पड़ी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग की कार्रवाई सिर्फ एक धंधा है। पहले प्रमाणपत्र दिया जाता है, फिर छोटी-छोटी कमियों के नाम पर क्लीनिक सील कर दिया जाता है और कुछ समय बाद वही क्लीनिक फिर से खोल दिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव चारों ओर से नदियों और जंगलों से घिरा हुआ है। यहां गंभीर बीमारियों या दुर्घटनाओं की स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में झोलाछाप प्रैक्टिशनर ही लोगों की जान बचाने का काम करता है। उनका कहना था कि प्रशासनिक टीम गांव के इकलौते चिकित्सक को बंद करने आई है, जबकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र खुद बदहाल स्थिति में है।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में न दवाइयां मिलती हैं और न ही नियमित डॉक्टर मौजूद रहते हैं। एंबुलेंस सुविधा भी नाम मात्र की है। ऐसे हालात में यदि विभाग वास्तव में लोगों के हित में कदम उठाना चाहता है, तो सबसे पहले गांव में स्थायी डॉक्टर और एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराए। जब तक यह नहीं होता, तब तक प्रैक्टिशनरों पर कार्रवाई सरासर अन्याय है।



