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चैनपुर में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में इन दिनों सवारी गाड़ियों की घोर मनमानी देखने को मिल रही है, जो किसी भी दिन एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए इस बाजार पर निर्भर हैं, लेकिन गाड़ी मालिक “चंद पैसों” के लालच में उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं।आलम यह है कि गाड़ियों के अंदर सीटें भर जाने के बाद भी यात्रियों को गाड़ियों की छतों पर बैठाकर खतरनाक तरीके से ले जाया जा रहा है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब यह क्षेत्र एक पठारी इलाका है, जहाँ रास्ते ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक घाटियों से भरे हुए हैं। इन रास्तों पर संतुलन बिगड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है और छत पर बैठे यात्रियों की एक छोटी सी चूक भी कई लोगों की जान ले सकती है।
जान जोखिम में डालकर सफर करने की मजबूरी
सूत्रों के अनुसार, इस तरह खतरनाक तरीके से यात्रा करने वालों में अधिकांश लोग दूर-दराज के पीवीटीजी क्षेत्रों जैसे डोका पाठ, बेसना पाठ, और गड्ढा पाठ के ग्रामीण होते हैं। इन क्षेत्रों के लिए परिवहन के सीमित साधन ही उपलब्ध हैं, जिसका फायदा गाड़ी मालिक उठा रहे हैं।
ग्रामगाड़ी योजना भी ओवरलोडिंग की शिकार
ऐसा नहीं है कि सरकारी स्तर पर प्रयास नहीं हुए हैं। इन पठारी क्षेत्रों के निवासियों की सुविधा के लिए सरकार द्वारा ” मुख्यमंत्री ग्रामगाड़ी योजना” के तहत बस सेवा भी शुरू की गई है। लेकिन, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन सरकारी बसों में भी क्षमता से अधिक सीट से अधिक लोगों को भरा जाता है, जिससे सुविधा की जगह भारी असुविधा होती है। इस ओवरलोडिंग के कारण भी यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
बाजार आने वाले ग्रामीणों की मजबूरी और परिवहन की कमी का फायदा उठाकर, निजी गाड़ी मालिक अपनी मनमानी पर उतारू हैं। यदि स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग ने इस अवैध और जानलेवा ओवरलोडिंग पर जल्द ही कोई सख्त कार्रवाई नहीं की, तो इन गाड़ी मालिकों की लापरवाही के कारण किसी भी दिन एक बड़ी और दर्दनाक दुर्घटना घट सकती है।

