Chainpur, (Gumla): भाषा की दीवार कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन चैनपुर पुलिस की सतर्कता ने इसे सुखद मिलन में बदल दिया। चैनपुर थाना क्षेत्र के कतारी कोना में बीते शुक्रवार को ग्रामीणों ने ‘बच्चा चोर’ होने के संदेह में एक युवक को पकड़ लिया था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उत्तेजित भीड़ के चंगुल से युवक को सुरक्षित छुड़ाकर थाने ले आई।

भीड़ का शक और पुलिस की पड़ताल

पकड़ा गया युवक बेहद गंदा था, फटे कपड़े-जूते पहने हुए था और मानसिक रूप से विक्षिप्त लग रहा था। ग्रामीणों को वह ‘बच्चा चोर’ लग रहा था क्योंकि वह उनकी भाषा नहीं समझ पा रहा था और न ही हिंदी बोल पा रहा था। थाने लाकर जब दरोगा राजेंद्र मंडल ने उससे बंगाली भाषा में बात की (जो उन्होंने अपनी कोलकाता में पढ़ाई के दौरान सीखी थी), तो युवक सहज हो गया और उसने अपनी पहचान बताई।

सोशल मीडिया और तकनीक का सहारा

युवक ने अपना नाम राजू हंसदा उर्फ मानस हंसदा (25 वर्ष) बताया। उसने जानकारी दी कि वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के दातन थाना अंतर्गत बासबोनी गांव का रहने वाला है। वह घर से साइकिल से निकला था और भटकते हुए यहाँ पहुँच गया।चैनपुर पुलिस ने तुरंत दातन थाना से संपर्क साधा और व्हाट्सएप के माध्यम से युवक की फोटो भेजी। वीडियो कॉल के जरिए परिजनों ने उसकी पहचान की। परिजनों ने बताया कि राजू 26 फरवरी 2025 से लापता था और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।

8 महीने का इंतजार खत्म

शनिवार सुबह राजू के पिता खुदीराम हंसदा और अन्य परिजन चैनपुर थाना पहुंचे। 8 महीने बाद अपने बेटे को सही-सलामत पाकर परिजनों की आंखों में आंसू आ गए। पुलिस ने राजू को नहलाया, नए कपड़े दिए और भोजन कराकर सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया। एसआई राजेंद्र मंडल ने कहा मेरी पुरानी सीखी हुई बांग्ला भाषा आज किसी का घर बसाने के काम आई। जानकारी कभी व्यर्थ नहीं जाती। मिसकम्युनिकेशन के कारण जिसे लोग अपराधी समझ रहे थे, वह एक लाचार गुमशुदा बेटा निकला।

जनता से अपील

चैनपुर पुलिस ने इस घटना के माध्यम से आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को देखकर तुरंत ‘बच्चा चोर’ न समझें।कानून अपने हाथ में न लें और मारपीट न करें। संदेह होने पर तुरंत चैनपुर पुलिस को सूचित करें। परिजनों ने चैनपुर पुलिस की इस मानवीय कार्य की सराहना की।

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