India News: कर्नाटक में जातिगत जनगणना कल से शुरू होने जा रही है। इस बीच राज्य सरकार ने एक अहम घोषणा कर साफ किया है कि इस जनगणना का सीधा संबंध आरक्षण से नहीं होगा। गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि जातिगत जनगणना का मकसद सिर्फ यह जानना है कि आजादी के बाद से अब तक समाज के अलग-अलग समुदाय शिक्षा, रोजगार और प्रगति के क्षेत्र में कहां तक पहुंचे हैं।

गृहमंत्री बोले- आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं, सिर्फ आंकड़े जुटाए जाएंगे

गृहमंत्री ने कहा कि इस जनगणना से जुटाए गए आंकड़े भविष्य में केवल सरकारी योजनाएं बनाने और जरूरतमंद तबकों के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार करने में इस्तेमाल किए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि इसका आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सीएम सिद्धारमैया ने समझाया- क्यों जरूरी है जातिगत जनगणना

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस जनगणना को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जातियों की गिनती नहीं, बल्कि एक समग्र सामाजिक अध्ययन होगा। इसमें जातियों के साथ-साथ आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक स्थिति को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का मकसद समाज के वंचित वर्गों को बराबरी के अवसर दिलाना है।

जातिगत जनगणना को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर मुख्यमंत्री ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार भी जातिगत जनगणना कराए तो क्या उसे भी साजिश कहा जाएगा? उन्होंने साफ किया कि समाज में बराबरी लाने के लिए गरीबों और वंचित वर्गों को सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

भाजपा की ओर से इस सर्वे का विरोध किए जाने और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग पर सिद्धारमैया ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीति से जोड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस जनगणना का मकसद समाज को बांटना नहीं है, बल्कि सामाजिक ढांचे को बेहतर तरीके से समझना और भविष्य के लिए योजनाएं बनाना है।

राज्य सरकार के इस कदम से कर्नाटक में जातिगत जनगणना को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक ओर विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सामाजिक न्याय और विकास के लिए जरूरी बता रही है।

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