Patna News : वक्फ संपत्तियों की रक्षा के नाम पर आयोजित की जा रही “वक्फ बचाओ, दस्तूर बचाओ” कांफ्रेंस को लेकर विवाद गहरा गया है। एदारा ए शरिया ने इस आयोजन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “धंधा” और थोक में सौदा करने का मंच बताया है। संस्था के वरिष्ठ मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने साफ शब्दों में कहा कि यह सम्मेलन वक्फ की सुरक्षा नहीं, बल्कि उसके नाम पर निजी लाभ के लिए किया जा रहा है।
मौलाना कुतुबुद्दीन ने कहा कि इमारत ए शरिया और खानकाह जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पवित्र नामों को जनता की भावनाओं से खेलने और आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से जोड़ना निंदनीय है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के आयोजनों से दूर रहें और किसी भी भ्रम में न आएं।
एदारा ए शरिया ने स्पष्ट कहा कि यह कांफ्रेंस धार्मिक नहीं, व्यावसायिक उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इसका असल मकसद वक्फ संपत्तियों की रक्षा नहीं, बल्कि उन्हें सौदेबाजी की तरह पेश करना है। मौलाना कुतुबुद्दीन ने कहा कि वक्फ एक धार्मिक और सामाजिक अमानत है और उसका सौदा करना शरीयत के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर वाकई वक्फ की हिफाज़त करनी है तो समाज के ईमानदार और जिम्मेदार लोग आगे आएं, न कि ऐसे तत्व जो मंच का इस्तेमाल अपने निजी एजेंडे के लिए कर रहे हैं।
एदारा ए शरिया ने आम मुस्लिम समाज से अपील की है कि इस कांफ्रेंस का बहिष्कार करें और ऐसे आयोजनों से सतर्क रहें जिनका मकसद केवल दिखावा और निजी लाभ होता है।
संस्था ने सरकार और वक्फ बोर्ड से भी मांग की है कि इस प्रकार के आयोजनों पर कड़ी नजर रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वक्फ संपत्तियों का किसी भी तरह से अनुचित व्यावसायीकरण न हो।



