Ranchi : झारखंड की राजनीति में सोमवार को तब हलचल मच गई जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाए। मरांडी ने बोकारो में हुए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड घोटाले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके असली सरगना खुद मुख्यमंत्री हैं।
प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने DMFT फंड को अपना ATM कार्ड बना लिया है। अधिकारियों के जरिए पैसे की निकासी कराकर इसे अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ बोकारो की बात नहीं, बल्कि पूरे राज्य में इसी तरह की लूट हुई है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि अगर वे खुद को पाक-साफ साबित करना चाहते हैं, तो इसकी जांच CBI से कराने की सिफारिश करें। उन्होंने कहा कि राज्य की किसी एजेंसी से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि सरकार खुद इस मामले में शामिल है।
भाजपा नेता ने बताया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में DMFT फंड से 631 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। बोकारो जिले के 46 पंचायतों में जेनरेटर सप्लाई, 1666 आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल मेट्स, स्कूलों में टैब लैब, शहर में 187 हाई मास्ट लाइट, एलईडी वैन, तड़ित चालक, वॉल पेंटिंग, सौर ऊर्जा पंपसेट, मॉड्यूलर किचन और स्मार्ट मॉडल स्कूलों के उन्नयन जैसे कार्यों में भारी घोटाला किया गया।
मरांडी ने कहा कि बाजार दर से 10 गुना ज्यादा कीमत पर सामान खरीदे गए और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया। यह संभव नहीं है कि इतना बड़ा घोटाला सिर्फ अधिकारी स्तर पर हुआ हो। इसके पीछे मुख्यमंत्री की सीधी भूमिका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खनन क्षेत्र के गरीबों और जरूरतमंदों को ध्यान में रखकर DMFT फंड की व्यवस्था की थी, ताकि सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें। लेकिन झारखंड में इस फंड को लूट का जरिया बना दिया गया।
मरांडी ने आरोप लगाया कि जब सामाजिक संगठन इस घोटाले पर सूचना मांगते हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से भी जांच कराने की मांग उठाएगी। प्रेसवार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और अशोक बड़ाइक भी मौजूद थे।



