Patna News: सीट बंटवारे के बाद सबसे पहले मांझी ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके दल की ताकत को कम करके आंका गया और इसका खामियाजा एनडीए को भुगतना पड़ सकता है। इसके बाद कुशवाहा का भी सोशल मीडिया पर ‘खुला संदेश’ सामने आया, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं से क्षमा मांगते हुए कहा कि पार्टी को मनमुताबिक सीटें नहीं मिली। दोनों नेताओं के ऐसे भावनात्मक संदेशों ने एनडीए में अंदरूनी असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट में राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह नाराजगी चुनावी समीकरणों पर असर डालेंगी। खासकर इस असंतोष का असर उन क्षेत्रों में दिखाई देगा जहां जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा का मजबूत जनाधार है। बता दें रविवार को एनडीए की बैठक में सीट शेयरिंग की डील फाइन हो गई तो सबकुछ ऑल इन वेल कहा जाने लगा। इसके बारे में एनडीए के तमाम घटक दलों के नेताओं ने अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी।
जीतन राम मांझी ने जताई नाराजगी
उन्होंने लिखा- एनडीए में तमाम घटक दलों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में टिकट बंटवारा कर लिया है। राजनीति के जानकार भी कहने लगे कि एनडीए ने सीट बंटवारे का ऐलान करके महागठबंधन पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है, लेकिन सीट शेयरिंग की घोषणा के चंद घंटे बाद ही एनडीए के सहयोगी जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के बयान ने गठबंधन के नेताओं की चिंता बढ़ा दी। सबसे पहले मांझी ने कहा कि हमारी ताकत को कम आंका गया, इसका खामियाजा एनडीए को भुगतना पड़ेगा। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की सोशल मीडिया पोस्ट ने एनडीए की चिंता और बढ़ा दी। उपेंद्र कुशवाहा ने तो अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए एक खुला संदेश दे दिया।
कुशवाहा का खुला पत्र, कार्यकर्ताओं से मांगी माफी
उन्होंने संदेश में लिखा- प्रिय मित्रों और साथियों, आप सभी से क्षमा चाहता हूं। आपके मन के अनुकूल सीटों की संख्या नहीं हो पाई। मैं समझ रहा हूं, इस फैसले से अपनी पार्टी के उम्मीदवार होने की इच्छा रखने वाले साथियों समेत हजारों-लाखों लोगों का मन दुखी हुआ होगा। आज कई घरों में खाना नहीं बना होगा लेकिन आप सभी मेरी और पार्टी की विवशता और सीमा को बखूबी समझ रहे होंगे। किसी भी फैसले के पीछे कुछ परिस्थितियां होती हैं जो बाहर से दिखतीं हैं लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जो बाहर से नहीं दिखतीं। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अन्दर की परिस्थितियों से अनभिज्ञता के कारण आपके मन में मेरे प्रति गुस्सा भी होगा जो स्वाभाविक भी है। आपसे विनम्र आग्रह है कि आप गुस्से को शांत होने दीजिए, फिर आप स्वयं महसूस करेंगे कि फैसला कितना उचित है या अनुचित। फिर आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना ही। सधन्यवाद, आपका-उपेन्द्र कुशवाहा।
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एनडीए में असंतोष की लहर
वहीं जीतन मांझी की उदासी और नाराजगी जाहिर करने के बाद उपेंद्र कुशवाहा का यह खुला पत्र एनडीए की टेंशन बढ़ा रहा है, क्योंकि जिस तरह से एनडीए में सिर्फ चिराग पासवान की चली, उसने एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों की नाराजगी बढ़ा दी है। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि कुशवाहा और मांझी दोनों ही उस तबके से आते हैं जो एनडीए के मजबूत वोट बैंक का बड़ा आधार है और इन दोनों की नाराजगी बरकरार रही तो इसका असर आने वाले चुनाव में पड़ सकता है।
चिराग पासवान की बढ़ी भूमिका
बता दें एनडीए के अंदर इस नाराजगी का असर सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह सकता, जिस तरह सीट बंटवारे में चिराग पासवान की भूमिका अहम रही और वह अपने साथ अन्य सहयोगियों पर भारी पड़े, उसने बाकी एनडीए के अंदर ही सहयोगियों में असंतोष की भावना को बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि शीर्ष नेतृत्व किस तरह से इस असंतोष को संभालता है।



