New Delhi — अगर मैं आपसे कहूं कि कोई बिना कुछ खाए-पिए और बिना एक पल रुके लगातार 11 दिनों तक आसमान में उड़ सकता है, तो शायद आप मुझे पागल समझेंगे। लेकिन रुकिए, इंसान तो छोड़िए बड़े-बड़े हवाई जहाजों के भी पसीने छुड़ा देने वाला यह कारनामा कर दिखाया है कुदरत के एक नन्हे ‘बाहुबली’ ने। ‘बी6’ नाम के महज चार महीने के एक पक्षी ने अलास्का से ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तक 13,560 किलोमीटर की ऐसी उड़ान भरी है कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिक दांतों तले उंगली दबाए बैठे हैं।
यह जादुई पक्षी ‘बार-टेल्ड गॉडविट’ प्रजाति का है। साल 2022 में जब इसने यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, तब इसकी उम्र बहुत कम थी। वैज्ञानिकों ने इस पर एक सैटेलाइट टैग लगाया था, जिससे पता चला कि इसने प्रशांत महासागर के ऊपर से गुजरते हुए जानवरों की दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। आप यकीन नहीं करेंगे कि इस सफर के दौरान इसकी रफ्तार 55 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा थी और पूरे रास्ते न तो कहीं जमीन थी और न ही दाना-पानी।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये नन्हा सा जीव इतना दम लाता कहां से है? तो भईया, इस ‘सुपर-मैराथन’ के लिए बी6 ने अलास्का में जमकर दावत उड़ाई और अपने शरीर का आधा वजन चर्बी में बदल लिया। उड़ते वक्त ऊर्जा बचाने के लिए इसने अपने शरीर के अंदरूनी अंगों को सिकोड़ कर छोटा कर लिया। और रास्ता भटकने का तो सवाल ही नहीं उठता! इन पक्षियों के पास कुदरती नेविगेशन सिस्टम होता है। इनकी आंखों में खास प्रोटीन होते हैं जो धरती के चुंबकीय क्षेत्र को पहचान लेते हैं, यानी इनके पास अपना इन-बिल्ट कंपास है।
सबसे मजेदार बात तो ये है कि 11 दिन तक ये सोया कैसे? दरअसल, ये पक्षी हवा में उड़ते हुए ही अपनी नींद पूरी कर लेते हैं। इसे ‘यूनिहेमिस्फेरिक स्लीप’ कहते हैं, जिसमें दिमाग का आधा हिस्सा सोता है और दूसरा हिस्सा उड़ने के लिए अलर्ट रहता है—यानी एक आंख खोलकर सोना। ऊर्जा बचाने के लिए ये हवा के बहाव के हिसाब से अपनी ऊंचाई भी बदलते रहते हैं। वाकई, कुदरत की ये इंजीनियरिंग किसी अजूबे से कम नहीं है!



