अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Ranchi News: 10वीं मुहर्रम के अवसर पर रविवार को राजधानी रांची की मस्जिद जाफरिया से आशूरा का ऐतिहासिक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस इमाम हुसैन की कुर्बानी और कर्बला की ऐतिहासिक घटना की याद में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
झारखंड वक्फ बोर्ड के सदस्य एवं मस्जिद जाफरिया के इमाम मौलाना हाजी सैयद तहजीबुल हसन रिजवी ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि कर्बला सिर्फ एक युद्ध नहीं था, बल्कि इंसाफ और सच्चाई के लिए दी गई सबसे बड़ी कुर्बानी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अगर आज कर्बला न होता तो दुनिया को यह संदेश नहीं मिलता कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना और सच के लिए जान कुर्बान करना एक वीरता है।
मौलाना तहजीबुल हसन ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने भूख-प्यास सहकर भी यजीद की सत्ता के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया। यही सच्चाई की ताकत है, जिसे आज तक पूरी दुनिया सलाम करती है।
जुलूस मस्जिद जाफरिया से शुरू होकर विक्रांत चौक, चूना मंदिर, चर्च रोड, टैक्सी स्टैंड, डेली मार्केट थाना, उर्दू लाइब्रेरी, अंजुमन प्लाजा होते हुए कर्बला तक पहुंचा। इसमें नोहा खानी (शोक गीत) भी प्रस्तुत की गई, जिसे कासिम अली, अबुजर अली, गुलाम हुसैन और अन्य ने पढ़ा।
जुलूस में विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के लोग भी शामिल हुए, जो भाईचारे और इंसानियत का प्रतीक रहा। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, अकील-उर-रहमान, इमाम बख्श अखाड़ा के खलीफा महजूद, भाजपा नेता तारिक, सैयद निहाल अहमद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

