Lifestyle Desk: गुस्सा आना गलत नहीं है। हम सबको आता है। कभी यह हमें हिम्मत देता है, तो कभी वही गुस्सा अगर बेकाबू हो जाए तो शरीर और दिमाग दोनों पर भारी पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक लगातार गुस्से में रहने से दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव का खतरा बढ़ सकता है।
जब हमें गुस्सा आता है, तो शरीर तुरंत अलर्ट मोड में चला जाता है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है, सांस उखड़ने लगती है और दिमाग तर्क की बजाय भावनाओं से फैसले लेने लगता है। ऐसे समय सबसे आसान तरीका है—सांस पर ध्यान देना। आंखें बंद करें, चार सेकंड में गहरी सांस लें, सात सेकंड रोकें और आठ सेकंड में धीरे-धीरे छोड़ें। कुछ ही मिनट में दिमाग शांत होने लगता है और प्रतिक्रिया देने की बजाय सोचने की क्षमता लौट आती है।
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गुस्से में शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। ऐसे में धीरे-धीरे एक गिलास ठंडा पानी पीना फायदेमंद होता है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है और मन भी थोड़ा हल्का होता है। कई बार आपने खुद महसूस किया होगा—पानी पीते ही थोड़ा सुकून मिल जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार गुस्सा कफ और पित्त के असंतुलन का संकेत है। इसलिए इसे दबाने की बजाय संतुलित करना जरूरी है। तुलसी की चाय, हल्दी वाला दूध या अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियां मन को शांत करने में मदद कर सकती हैं।
योग और प्राणायाम भी गुस्से को नियंत्रित करने का असरदार तरीका है। अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे अभ्यास नर्वस सिस्टम को संतुलित करते हैं। रोजाना कुछ मिनट का ध्यान मन को स्थिर बनाता है, जिससे छोटी-छोटी बातों पर भड़कने की आदत कम होती है।
सबसे जरूरी बात—जब गुस्सा आए तो तुरंत जवाब देने की जल्दी न करें। पांच मिनट का मौन कई रिश्तों को टूटने से बचा सकता है। कभी-कभी चुप रहना ही सबसे समझदारी भरा जवाब होता है।



