Colombo, (Srilanka): अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गई है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 को इस युद्ध का छठा दिन है और सबसे दर्दनाक खबर श्रीलंका के गाले (Galle) तट से करीब 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से आई है। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी नौसेना के आधुनिक फ्रिगेट ‘IRIS देना’ (IRIS Dena) को बिना किसी चेतावनी के टॉरपीडो से निशाना बनाकर समुद्र की गहराइयों में दफन कर दिया।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे “शांत मौत” (Quiet Death) करार दिया। उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन जहाज को डुबोया है।

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श्रीलंका की दोहरी भूमिका: रेस्क्यू और कूटनीतिक दबाव श्रीलंकाई नौसेना के अनुसार, हमले के वक्त जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 32 नाविकों को बचाकर गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। करीब 60 लोग अब भी लापता हैं।

इस बीच, एक और बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। एक दूसरा ईरानी जहाज ‘IRINS बुशहर’ (IRINS Bushehr) मदद की गुहार लगाते हुए श्रीलंका के बंदरगाह पर आना चाहता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते श्रीलंका सरकार ने उसे अनुमति देने से इनकार कर दिया। श्रीलंका ने स्पष्ट किया कि वह मानवीय आधार पर खाना और दवाएं तो भेजेगा, लेकिन सैन्य जहाज को अपनी सीमा में घुसने नहीं देगा।

भारत से लौट रहा था ‘देना’ यह जहाज ईरान के लिए बेहद खास था क्योंकि यह 18 फरवरी को भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘मिलान-2026’ और ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में हिस्सा लेने आया था। 25 फरवरी को भारत से विदाई लेकर लौटते समय इसे अमेरिका ने अपना निशाना बनाया।

ट्रंप प्रशासन को मिला ‘ग्रीन सिग्नल’ वहीं वाशिंगटन से खबर है कि अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की शक्तियों पर अंकुश लगाने वाले ‘वार पावर्स’ प्रस्ताव को 47 के मुकाबले 53 वोटों से खारिज कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक तेज कर सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के इस उल्लंघन के “बुरे नतीजे” भुगतने होंगे।

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