Landon, (UK): लंदन से आई यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है। इंग्लैंड के एसेक्स में रहने वाले 27 वर्षीय शान होलैंड की जिंदगी शराब की लत ने लगभग खत्म कर दी थी।

शान ने 18 साल की उम्र में एंग्जायटी और पैनिक अटैक से राहत पाने के लिए बीयर पीना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें लगा कि इससे दिमाग शांत होता है। लेकिन धीरे-धीरे यही आदत लत में बदल गई। 21 साल की उम्र तक हालात ऐसे हो गए कि वे काम पर जाने से पहले भी शराब पीते थे। अगर सुबह ड्रिंक न मिले तो हाथ कांपने लगते थे।

कुछ ही सालों में उनकी खपत इतनी बढ़ गई कि वे नाश्ते में आधा पिंट वोडका और दिनभर में छह बोतल वाइन तक पी जाते थे। रोजाना करीब 6 हजार रुपये की शराब उनके शरीर को अंदर से खोखला कर रही थी। शराब के बाद उनका व्यवहार भी बदल जाता था। वे आक्रामक हो जाते और इसी वजह से अगस्त 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच तीन बार जेल भी गए।

मार्च 2025 में जन्मदिन की सुबह होटल के कमरे में जागे तो चारों तरफ खाली बोतलें थीं। उसी पल उन्हें अपनी हालत का एहसास हुआ। एक क्षण के लिए आत्महत्या का विचार आया, लेकिन फिर उन्होंने जिंदगी बदलने का फैसला किया।

शराब छोड़ने के बाद शरीर ने भयानक प्रतिक्रिया दी। उन्हें दौरे पड़े और अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। जांच में सामने आया कि लिवर बुरी तरह डैमेज है, किडनी प्रभावित है और स्प्लीन व पैंक्रियाज भी खतरे में हैं। पेशाब का रंग गहरा हो गया था और पूरा शरीर पीलिया जैसा पीला पड़ चुका था। डॉक्टरों ने साफ कहा कि अंग फेल होने की कगार पर हैं।

करीब तीन महीने तक हालत गंभीर रही। अस्पताल से छुट्टी के बाद दो महीने रिहैब में बिताए। अब 11 महीने से वे पूरी तरह सोबर हैं और दूसरों को नशे से बाहर निकलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

शान की कहानी चेतावनी भी है और उम्मीद भी—लत कितनी भी गहरी क्यों न हो, फैसला मजबूत हो तो वापसी संभव है।

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