रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों ‘सीएजी रिपोर्ट’ (CAG Report) को लेकर उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट के हवाले से राज्य की हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार खजाना खाली होने का राग अलापती है, वहीं दूसरी तरफ हजारों करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो रही हैं।
“नियम नहीं बनाए, इसलिए डूबे करोड़ों रुपये”
आदित्य साहू ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हेमंत सरकार विकास कार्यों के लिए हमेशा केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करती है, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य सरकार की अपनी लापरवाही के कारण 14वें वित्त आयोग के 486 करोड़ रुपये सिर्फ इसलिए नहीं मिल सके क्योंकि सरकार जरूरी नियम ही नहीं बना पाई। इसके अलावा, 258 करोड़ रुपये ऐसे हैं जिन्हें सरकार खर्च ही नहीं कर सकी। यह सीधे तौर पर राज्य की जनता के हक पर डकैती जैसा है।
7,592 करोड़ का हिसाब गायब
आदित्य साहू ने वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि रिपोर्ट में साफ है कि 7,592 करोड़ रुपये के ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ (UC) अभी तक जमा नहीं किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतना पैसा कहां गया? भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में घोटालों की एक लंबी श्रृंखला चल रही है। पंचायतों के विकास के लिए मिले धन का बंदरबांट हुआ है, पंचायत भवनों के निर्माण में धांधली की गई है और योजनाओं का सोशल ऑडिट तक नहीं कराया गया।
बुनियादी सुविधाओं का अकाल
प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की बदहाल स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज झारखंड का आम नागरिक बूंद-बूंद पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्कूलों में न शिक्षक हैं, न किताबें। छात्रवृत्ति और स्कूल ड्रेस के लिए बच्चे इंतजार कर रहे हैं, जबकि अस्पतालों में डॉक्टर, एम्बुलेंस और दवाइयों का भारी अभाव है। उन्होंने किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धान खरीद के पैसे अब तक बकाया हैं, जबकि डीएमएफटी (DMFT) फंड की बेरहमी से लूट हो रही है।
श्वेतपत्र और सीबीआई जांच की मांग
भाजपा ने दो टूक शब्दों में सरकार से मांग की है कि इस वित्तीय कुप्रबंधन पर तत्काल ‘श्वेतपत्र’ जारी किया जाए। आदित्य साहू ने कहा कि राज्य के खजाने से हुई इस हजारों करोड़ की कथित लूट की सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार को सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश करनी चाहिए।



