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Ranchi : डॉ. रामदयाल मुण्डा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, रुम्बुल और मुण्डारी साहित्य परिषद, रांची के संयुक्त तत्वावधान में आज महान चिंतक, शिक्षाविद् और आदिवासी समाज के प्रखर व्यक्तित्व डॉ. रामदयाल मुण्डा की 86वीं जयंती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रदेशभर से विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
मुख्य अतिथि के रूप में कोलेबिरा के विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. सत्यनारायण मुण्डा, पूर्व कुलपति, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय ने कहा कि डॉ. मुण्डा ने झारखंडी समाज, भाषा और संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उन्हें आगे बढ़ाना ही हम सबकी जिम्मेदारी है।
वहीं, गणेश मुर्मू (सहायक प्राध्यापक, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग) ने कहा कि डॉ. मुण्डा ने जनजातीय अस्मिता और गौरव को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। लेखक एवं पूर्व निदेशक टी.आर.आई. रांची रणेन्द्र कुमार ने उनके कार्यों को “भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत” बताया। कार्यक्रम को आदिवासी कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी और टी.आर.आई. रांची के निदेशक कर्मा जिम्पा भुटिया ने भी संबोधित किया।
समारोह में ‘अबुआ न्यूज’ नामक न्यूज़ पोर्टल का लोकार्पण किया गया। यह पोर्टल झारखंडी भाषाओं में प्रकाशित होगा और जनजातीय भाषाओं को डिजिटल मंच देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वक्ताओं ने इसे भाषा-संस्कृति संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
इस अवसर पर विभिन्न जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के रचनाकारों को सम्मानित भी किया गया।
सम्मानित रचनाकारों में शामिल रहे–
- मुंडारी भाषा: नबिन मुंडू एवं मंगल सिंह मुंडा
- कुड़ुख भाषा: डॉ. हरि उरांव
- हो भाषा: डॉ. दामयंती सिंकु
- खड़िया भाषा: इलियास बा
- खोरठा भाषा: डॉ. बी.एन. ओहदार
- पंचपरगनिया भाषा: डॉ. करमचंद अहीर
- नागपुरी भाषा: डॉ. खालिक अहमद
- कुरमाली भाषा: डॉ. एच.एन. सिंह
- संथाली भाषा: डॉ. के.सी. टुडु
समारोह में वक्ताओं ने यह भी संकल्प लिया कि आने वाले वर्षों में डॉ. मुण्डा के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा और झारखंडी भाषाओं व संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की जाएगी। आयोजन समिति में मोनिका रानी टुटी (उप निदेशक, टी.आर.आई), राकेश रंजन उराँव (सहायक निदेशक, टी.आर.आई), रूबी कुमारी (उप निदेशक, टी.आर.आई), अमृता प्रियंका एक्का (सहायक निदेशक, टी.आर.आई), डॉ. अजीत मुण्डा एवं डॉ. खातिर हेमरोम शामिल थे। समिति ने कहा कि यह आयोजन न सिर्फ श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का भी स्रोत है।
कार्यक्रम का समापन झारखंडी गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि डॉ. मुण्डा के सपनों को साकार करने के लिए भाषा, संस्कृति और पहचान की लड़ाई को मजबूत किया जाएगा।

