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Home»#Trending»नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की मांगों को मजबूती से रखा, खनन, रोजगार और राजस्व पर दिए ठोस सुझाव
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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की मांगों को मजबूती से रखा, खनन, रोजगार और राजस्व पर दिए ठोस सुझाव

विकसित भारत @2047 के लिए झारखंड का सहयोग जरूरी: महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, कृषि और अधोसंरचना पर विचार
By Muzaffar HussainMay 24, 20255 Mins Read
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New Delhi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग लिया। इस उच्चस्तरीय बैठक में झारखंड की ओर से मुख्यमंत्री ने राज्य की आवश्यकताओं, चुनौतियों और संभावनाओं को मजबूती से रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी जब भारत के सभी राज्य समावेशी विकास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है जब देश के गांव, गरीब, महिला, किसान और युवा सशक्त बनें। उन्होंने गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के कौशल विकास, किसानों की आय वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी व आधारभूत संरचना के विकास को विकसित भारत की नींव बताया।

महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में ठोस पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड सरकार महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। राज्य सरकार हर महीने लगभग 50 लाख महिलाओं को ₹2500 की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

खनन कंपनियों पर 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया, जल्द भुगतान की मांग

मुख्यमंत्री ने खनन के क्षेत्र में झारखंड की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि झारखंड देश का एक प्रमुख खनिज उत्पादक राज्य है, लेकिन इसके खनन से जुड़ी गतिविधियों से राज्य को प्रदूषण और विस्थापन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि खनन कंपनियों द्वारा ली गई भूमि का मुआवजा ₹1,40,435 करोड़ अब भी बकाया है, जिसे जल्द से जल्द राज्य सरकार को प्रदान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कोल बेड मीथेन गैस का ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग करने का सुझाव दिया और कहा कि खनन कंपनियों को कैप्टिव प्लांट लगाने के लिए बाध्य किया जाए। साथ ही, उन्होंने आग्रह किया कि खनन पश्चात भूमि को राज्य सरकार को पुनः सौंपने का प्रावधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झारखंड का वन क्षेत्र पूर्वोत्तर राज्यों के समकक्ष है, जिससे विकास परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी मिलने में देरी होती है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि जैसे पूर्वोत्तर राज्यों को विशेष सहायता दी जाती है, वैसे ही झारखंड को भी यह सुविधा दी जाए।

परिवहन एवं अधोसंरचना के विकास पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने राज्य में रेलवे सेवाओं के विस्तार की मांग करते हुए कहा कि इससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कंपनियों के CSR और DMFT फंड को राज्य की विकास प्राथमिकताओं में शामिल करने की मांग की।

उन्होंने साहेबगंज जिले को कार्गो हब के रूप में विकसित करने पर बल दिया और गंगा नदी पर एक अतिरिक्त पुल या उच्च स्तरीय बांध के निर्माण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में एक डेडीकेटेड इंडस्ट्रियल माइनिंग कॉरिडोर का निर्माण होना चाहिए, जिससे सामान्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्र सरकार की योजनाओं में बदलाव की आवश्यकता

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे पेंशन योजना, मइयां सम्मान योजना और अबुआ स्वास्थ्य योजना चला रही है। उन्होंने केंद्र से अपील की कि केंद्र की योजनाएं राज्य की जरूरतों के अनुरूप लागू की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार 25 लाख परिवारों को प्रतिमाह 5 किलो चावल, 28 लाख परिवारों को ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा और आयुष्मान भारत से वंचित 38 लाख गरीब परिवारों को ₹15 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करा रही है। उन्होंने जिला स्तर पर हेल्थ प्रोफाइलिंग को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का सुझाव भी दिया।

उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना इत्यादि की वित्तीय राशि में वृद्धि की जाए। साथ ही, उन्होंने CNT और SPT एक्ट के कारण उत्पन्न निवेश संबंधी अड़चनों का समाधान वित्त मंत्रालय के सहयोग से करने का आग्रह किया।

नक्सल प्रभावित जिलों को विशेष केंद्रीय सहायता जारी रखने की मांग

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2014 में राज्य के 16 जिले नक्सल प्रभावित थे, जो अब घटकर केवल 2 जिलों – पश्चिमी सिंहभूम और लातेहार तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रगति के बावजूद सभी 16 जिलों में विशेष केंद्रीय सहायता जारी रहनी चाहिए, ताकि पूर्ण रूप से नक्सलवाद का उन्मूलन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने यह भी बताया कि नक्सल उन्मूलन के लिए प्रतिनियुक्त CAPF बलों पर खर्च राज्य सरकार उठा रही है, जबकि यह भार सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप केंद्र को उठाना चाहिए।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा में केंद्र की भागीदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कोविड काल की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने उस समय राज्य के बाहर फंसे मजदूरों की मदद की थी। हाल ही में कैमरून में फंसे मजदूरों को भी सरकार ने अपने खर्च पर वापस बुलाया है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि जो मजदूर विदेशों में काम करना चाहते हैं, उनके वीजा, सुरक्षा और यात्रा व्यय में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।

राजस्व बंटवारे में न्याय की मांग

मुख्यमंत्री सोरेन ने नीति आयोग के समक्ष 16वें वित्त आयोग की व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच वर्टिकल डेवल्यूशन की हिस्सेदारी 41% से बढ़ाकर 50% की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा एकत्रित उपकर और अधिभार को भी विभाज्य पूल में शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि GST लागू होने के बाद झारखंड जैसे विनिर्माता राज्यों को भारी नुकसान हुआ है। शुरू में 14% प्रोटेक्टेड रेवेन्यू के तहत मुआवजा राशि मिली, लेकिन जून 2022 के बाद से कोई राशि नहीं मिली है, जिससे राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

विकसित झारखंड से ही साकार होगा विकसित भारत का सपना

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि “Viksit Bharat @2047” की परिकल्पना तभी साकार होगी जब झारखंड जैसे राज्यों को उचित केंद्रीय सहयोग प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड का सामर्थ्य, संसाधन और युवा शक्ति देश के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस बैठक में मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल एवं योजना सचिव मुकेश कुमार उपस्थित रहे।

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