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Dumka : व्यवहार न्यायालय परिसर, दुमका में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 10,762 मामलों का निपटारा आपसी सुलह और समझौते के आधार पर किया गया। इस प्रक्रिया में 73 करोड़ 40 लाख 70 हजार 972 रुपये की राशि का समाधान हुआ, जो न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता और जनता के सहयोग की मिसाल है। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव उत्तम सागर राणा ने जानकारी दी कि इस लोक अदालत का आयोजन झालसा (झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार), रांची के निर्देशानुसार किया गया था। लोक अदालत की अध्यक्षता प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार अध्यक्ष शत्रुंजय कुमार सिंह ने की। उन्होंने लोक अदालत के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच आम जनता को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम है।
इस बार की लोक अदालत के लिए छह बेंचों का गठन किया गया था, जिनके माध्यम से विभिन्न प्रकार के वादों का निष्पादन किया गया। इनमें परिवारिक वाद, दुर्घटना मुआवजा वाद (MACT), भूमि अधिग्रहण, सिविल और आपराधिक अपील, बैंक रिकवरी, माइनिंग केस, लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, प्रि-लिटिगेशन मामले, पुलिस एक्ट, माइनर एक्ट, एक्सक्यूटिव केस, सर्टिफिकेट केस और उपभोक्ता फोरम के वाद शामिल थे।
न्यायिक प्रक्रिया को जनसामान्य के लिए और अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से लोक अदालत स्थल पर विधिक जागरूकता स्टॉल भी लगाया गया, जहां ग्रामीणों और उपस्थित जनों को कानूनी जानकारी से संबंधित पुस्तिकाएं और पंपलेट वितरित किए गए। इस पहल का मकसद यह था कि ग्रामीण और कम जागरूक नागरिक भी अपने अधिकारों और न्यायिक विकल्पों के प्रति सजग हों।
लोक अदालत की सफलता यह दर्शाती है कि विवादों का समाधान सिर्फ न्यायालयों के माध्यम से नहीं, बल्कि आपसी संवाद और समझौते से भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इस आयोजन ने न केवल न्याय को त्वरित रूप दिया, बल्कि लोगों में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत किया।

