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कोलकाता | एजेंसी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले दक्षिण 24 परगना जिले में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। यूपी के ‘सिंघम’ कहे जाने वाले आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के बीच चल रही तकरार अब खुली धमकी और फिल्मी डायलॉग तक जा पहुंची है। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन जहांगीर खान ने पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “खेल तुमने शुरू किया है, खत्म हम करेंगे… पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।”
विवाद की शुरुआत तब हुई जब चुनाव आयोग द्वारा तैनात पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा सीआरपीएफ जवानों के साथ फलता स्थित जहांगीर खान के घर पहुंचे। वायरल वीडियो के अनुसार, आईपीएस अधिकारी ने खान के परिवार को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि यदि उनके समर्थकों ने मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की, तो अंजाम बुरा होगा। अधिकारी ने यहां तक कह दिया था, “बाद में रोना मत।” इस घटना के बाद टीएमसी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारी रात के वक्त घरों में घुसकर महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और इलाके में आतंक फैला रहे हैं।
अपनी जनसभा में गरजते हुए जहांगीर खान ने कहा कि कुछ सीआरपीएफ जवानों के दम पर हमें डराने की कोशिश न करें। उन्होंने जनसमुद्र की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर यहां के लोग पैदल चलें, तो तुम हवा में उड़ जाओगे। उन्होंने बीजेपी समर्थकों को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि यहां की एक-एक महिला ‘मां दुर्गा’ का रूप है और वे जानती हैं कि असुरों का वध कैसे करना है। उन्होंने खुले मंच से चुनौती दी कि वे बीजेपी को ‘जब्त और टाइट’ करना बखूबी जानते हैं।
अजय पाल शर्मा यूपी कैडर के तेजतर्रार अधिकारी माने जाते हैं और बंगाल चुनाव में उनकी तैनाती को सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, टीएमसी इसे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की साजिश करार दे रही है। अब मतदान से ठीक पहले इस ‘सिंघम बनाम नेता’ की जंग ने फलता और आसपास के इलाकों में चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
पुलिस पर्यवेक्षक की सख्ती और टीएमसी का विरोध
दक्षिण 24 परगना के पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में अजय पाल शर्मा की सक्रियता ने जहां असामाजिक तत्वों में डर पैदा किया है, वहीं टीएमसी इसे अपनी पार्टी को निशाना बनाने की कोशिश बता रही है। पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

