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Home»#Trending»सिस्टम फेल: 18 साल का इंतजार और परीक्षा के नाम पर मजाक, क्या फिर ‘जेल’ जाएगा आयोग?
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सिस्टम फेल: 18 साल का इंतजार और परीक्षा के नाम पर मजाक, क्या फिर ‘जेल’ जाएगा आयोग?

विश्वविद्यालय सेवा आयोग के रहते JPSC की ये कैसी ज़िद? JET परीक्षा में धांधली की पूरी कहानी।
Ashish SinghBy Ashish SinghApril 28, 20264 Mins Read
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रांची/बोकारो: झारखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे हजारों मेधावी छात्र 26 अप्रैल 2026 को व्यवस्था की बलि चढ़ गए। इस दिन आयोजित ‘झारखंड पात्रता परीक्षा’ (JET) में ऐसी अनियमितताएं देखने को मिलीं, जिन्होंने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विश्वसनीयता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही इस परीक्षा से छात्रों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अंततः उन्हें अव्यवस्था, मानसिक प्रताड़ना और अनिश्चितता ही हाथ लगी।

बोकारो का पेपर पहुँचा धनबाद : एजेंसी की अक्षम कार्यशैली

परीक्षा के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला बोकारो और रांची के केंद्रों से सामने आया। बोकारो के एक केंद्र पर ‘एजुकेशन’ (शिक्षा शास्त्र) विषय का प्रश्न पत्र पहुँचा ही नहीं। घंटों इंतजार के बाद जब हंगामा बढ़ा, तो बोकारो उपायुक्त (DC) ने स्पष्ट किया कि जिस एजेंसी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने भारी लापरवाही बरतते हुए बोकारो के प्रश्न पत्रों को गलती से धनबाद भेज दिया।

इस बड़ी चूक की वजह से छात्रों को दोपहर 1 बजे तक परीक्षा केंद्र के भीतर ही एक तरह से ‘कैद’ रहना पड़ा। अंततः आयोग को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी और ओड़िया व एजुकेशन विषय की परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा।

भाषाई त्रुटियों और क्षेत्रीय अस्मिता का अपमान

हैरानी की बात यह रही कि प्रश्न पत्रों में केवल प्रबंधन की कमी नहीं थी, बल्कि अकादमिक स्तर पर भी भारी गिरावट देखी गई। दर्जनों प्रश्न पत्रों में स्पेलिंग की इतनी गलतियां थीं कि परीक्षार्थी मूल शब्द का अर्थ समझने के लिए जूझते रहे। विशेषकर क्षेत्रीय भाषाओं जैसे नागपुरी, संथाली और कुरमाली के विषयों में यह समस्या सर्वाधिक रही। छात्रों का आरोप है कि राज्य की अपनी भाषाओं के प्रति आयोग का यह रवैया उनकी गंभीरता को दर्शाता है।

एडमिट कार्ड का ‘मायाजाल’ और गायब रोल नंबर

सिर्फ केंद्रों के भीतर ही नहीं, केंद्रों के बाहर भी छात्रों का बुरा हाल था। हजारों छात्र ऐसे थे जो अपने एडमिट कार्ड के आधार पर बताए गए पते पर पहुँचे, लेकिन वहां के सूचना पट्ट पर न तो उनका रोल नंबर था और न ही उस विषय की परीक्षा वहां हो रही थी। परेशान छात्रों ने जब JPSC के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो वहां से कोई उत्तर नहीं मिला। इस तकनीकी और प्रशासनिक गफलत के कारण सैकड़ों छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए।

गायब रहा झारखंड का ‘जीके’

नियमतः किसी भी राज्य की पात्रता परीक्षा में वहां के इतिहास, भूगोल और सामान्य अध्ययन से जुड़े कम से कम 20% प्रश्न पूछे जाने का चलन रहा है। पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में भी यही व्यवस्था लागू है। लेकिन 2026 की इस जेट परीक्षा में झारखंड से संबंधित प्रश्न नहीं थे, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रश्न पत्र झारखंड के बजाय किसी अन्य राज्य की दृष्टि से तैयार किया गया है।

गुटबाजी की शिकार JPSC : जेल यात्रा से भी नहीं लिया सबक?

वर्तमान में JPSC के भीतर दो गुट आमने-सामने नजर आ रहे हैं। एक गुट जहां निजी एजेंसियों के गलत कार्यों को प्रोत्साहित कर रहा है, वहीं दूसरा गुट इसे रोकने का प्रयास तो कर रहा किंतु वह असफल है। सभी दावे कागजों तक सीमित होकर बेजान हैं। गौरतलब है कि 2006 में हुई झारखंड पात्रता परीक्षा में JPSC की ऐसी बदनामी हुई थी कि अध्यक्ष समेत सभी सदस्य, परीक्षा नियंत्रक दर्जनों अधिकारी-पदाधिकारी तक को जेल की हवा खानी पड़ी थी। बावजूद JPSC सबक लेने का नाम नहीं ले रहा और अपने भ्रष्टाचार को चरमसीमा पर पहुंचा दिया है। 

विश्वविद्यालय सेवा आयोग को मिले कमान

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्य में ‘झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग’ का गठन हो चुका है, तो JPSC इस परीक्षा को कराने के लिए इतनी बेताबी क्यों दिखा रहा है? अभ्यर्थियों की मांग है कि भविष्य में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जिम्मेदारी नवनिर्मित ‘झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग’ को सौंपी जाए। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे, ताकि झारखंड के मेधावी छात्रों का भविष्य भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट न चढ़े।

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