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रांची: झारखंड के करोड़ों रुपये के बहुचर्चित शराब घोटाले में मुख्य आरोपितों की मुश्किलें अब कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने मामले के दो प्रमुख आरोपितों— राज्य सरकार के पूर्व सलाहकार अरुण पति त्रिपाठी और अरविंद कुमार की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब दोनों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
अदालत का कड़ा रुख
बता दें कि इस मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व में ही दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को जस्टिस की पीठ ने फैसला सुनाते हुए साफ किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देना संभव नहीं है। इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने भी इनकी याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं।
क्या है घोटाले का ‘छत्तीसगढ़ कनेक्शन’?
जांच एजेंसियों (ED और ACB) के अनुसार, अरुण पति त्रिपाठी झारखंड की नई शराब नीति के मुख्य रणनीतिकार थे। आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे के साथ साठगांठ कर छत्तीसगढ़ की शराब सिंडिकेट और प्लेसमेंट एजेंसियों को नियमों की धज्जियां उड़ाकर झारखंड में प्रवेश दिलाया। इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को अवैध लाभ पहुँचाया गया।
अब आगे क्या?
अरुण पति त्रिपाठी पर आरोप है कि उन्होंने सलाहकार रहते हुए सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली नीतियां बनाईं। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब जांच एजेंसियों के पास इन आरोपितों को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने का कानूनी आधार और मजबूत हो गया है। राजधानी रांची सहित पूरे राज्य की नजर अब इस घोटाले की अगली कड़ी और संभावित गिरफ्तारियों पर टिकी है।

