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रांची: झारखंड की एक अदालत ने दहेज लोभियों को कड़ा संदेश देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। साल 2021 में हुए चर्चित श्वेता रानी हत्याकांड में रांची के अपर न्याययुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए मृतका के पति, सास, ससुर और देवर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने सभी चारों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
क्या था पूरा मामला
श्वेता रानी की शादी बड़े ही अरमानों के साथ नारकोपी थाना क्षेत्र के खुखरा कोलपारा गांव निवासी शीतल साहू से हुई थी। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद, खुशियों की जगह तानों और प्रताड़ना ने ले ली। ससुराल पक्ष की ओर से लगातार दहेज की मांग की जा रही थी और इसे लेकर श्वेता के साथ अक्सर मारपीट की जाती थी। प्रताड़ना का सिलसिला इतना बढ़ गया कि मामला कोर्ट तक जा पहुंचा था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों परिवारों के बीच सुलह की कोशिशें भी हुई थीं, लेकिन लालच के अंधे ससुराल वालों के मन में कुछ और ही चल रहा था।
साजिश : “श्वेता भाग गई है”
6 अक्टूबर 2021 को श्वेता के मायके वालों के पास एक फोन आया, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। ससुराल वालों ने झूठ बोलते हुए सूचना दी कि श्वेता कहीं भाग गई है। अनहोनी की आशंका में जब श्वेता का भाई और अन्य परिजन खुखरा गांव पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। काफी खोजबीन के बाद श्वेता का शव उसके ससुराल से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित एक कुएं से बरामद हुआ।
कानून का डंडा : पूरा परिवार सलाखों के पीछे
श्वेता के भाई ने हिम्मत दिखाते हुए पति शीतल साहू, सास शीला देवी, ससुर रामचंद्र साहू और देवर सुजीत साहू के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर यह साबित हुआ कि श्वेता की मौत कोई दुर्घटना या पलायन नहीं, बल्कि दहेज के लिए की गई एक क्रूर हत्या थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समाज में दहेज जैसी कुरीतियों के लिए कोई जगह नहीं है। सजा पाने वालों में पति शीतल साहू के अलावा घर के बड़े और देवर भी शामिल हैं, जिससे यह साफ होता है कि अपराध में साथ देने वाला हर शख्स कानून की नजर में बराबर का दोषी है।

