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कोलकाता | एजेंसी
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच सियासी पारा अपने चरम पर है। इस बार रैलियों में भाषणों से ज्यादा एक गाना चर्चा का विषय बना हुआ है— “हृदय माझे काबा और नयने मदीना” (दिल में काबा और आंखों में मदीना)। टीएमसी सांसद और अभिनेत्री सायनी घोष अपनी चुनावी सभाओं में इस गीत को गाकर मुस्लिम वोटरों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही हैं। जहां सोशल मीडिया पर इसकी रील वायरल हो रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ का चरम करार दिया है।
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सायनी घोष, जो पेशे से अभिनेत्री रही हैं और उन्होंने ‘इच्चे दाना’ जैसी टेलीफिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी, आज टीएमसी का एक बड़ा चेहरा बन चुकी हैं। साल 2021 में राजनीति में कदम रखने वाली सायनी ने अभिषेक बनर्जी की जगह टीएमसी यूथ विंग की कमान संभाली थी, जिससे ममता बनर्जी के साथ उनकी नजदीकी का अंदाजा लगाया जा सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से बड़ी जीत दर्ज करने वाली सायनी अब अपनी गायन प्रतिभा का इस्तेमाल राजनीतिक मंचों पर कर रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल इलाकों में इस गाने के जरिए टीएमसी अपने पक्ष में माहौल बनाना चाहती है। हालांकि, सायनी का राजनीतिक सफर विवादों से भी घिरा रहा है। घोटालों में नाम आने से लेकर अपने तीखे बयानों तक, वह अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में उनका नारा ‘बंगाल दिखाएगा- ममता की क्षमता’ भी काफी चर्चा में रहा था।
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दूसरी ओर, बीजेपी समर्थकों ने इस गाने की रील शेयर करते हुए सवाल उठाए हैं कि आखिर एक सांसद सार्वजनिक मंच से इस तरह की धार्मिक अपील वाला गाना कैसे गा सकती है। बीजेपी का आरोप है कि चुनाव जीतने के लिए टीएमसी धर्म का सहारा ले रही है। बंगाल की विधानसभाओं में गूंजता यह गाना अब राज्य की चुनावी लड़ाई को कूटनीतिक मोड़ पर ले आया है।

