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रांची: झारखंड की राजनीति के चर्चित चेहरे और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के लिए बुधवार का दिन राहत भरा रहा। राजधानी रांची की एक विशेष अदालत (MP-MLAs Court) ने जानलेवा हमले और मारपीट से जुड़े करीब सात साल पुराने एक मामले में उन्हें और उनके साथ छह अन्य आरोपितों को बाइज्जत बरी कर दिया है।
साक्ष्य के अभाव में आया फैसला
विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत और साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। बता दें कि अदालत ने बीते 18 मार्च को इस मामले में लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 1 नवंबर 2017 का है। उस समय भारत स्काउट एंड गाइड्स, झारखंड के राज्य काउंसिल के चुनाव चल रहे थे। चुनाव में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान शिकायतकर्ता नरेश कुमार ने आरोप लगाया था कि उन्हें बैठक में शामिल होने से रोका गया। आरोप था कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई।
गंभीर आरोपों की फेहरिस्त
कोतवाली थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 298/2017 में बंधु तिर्की के अलावा उनके तीन अंगरक्षकों (रामदेव प्रसाद, विशाल उरांव, सीनू राम जोंको) और तीन अन्य सहयोगियों (अमोद कुमार सिंह, मोहन सिंह, दिलीप कुमार) को नामजद किया गया था। उन पर आरोप लगाए गए थे कि:
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लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया गया।
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अंगरक्षकों ने कॉलर पकड़कर कट्टा दिखाया और जान से मारने की धमकी दी।
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मारपीट के दौरान सोने की चेन छीनने जैसे आरोप भी लगाए गए थे।
हालांकि, कानूनी ट्रायल के दौरान ये आरोप कोर्ट में टिक नहीं सके। साक्ष्यों की कमी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के चलते अदालत ने सभी सात आरोपितों को दोषमुक्त करार दिया। इस फैसले के बाद बंधु तिर्की के समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं कानूनी जानकारों का मानना है कि ठोस साक्ष्य न होना बचाव पक्ष के लिए सबसे मजबूत कड़ी साबित हुआ।

