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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का 14वां दिन भी काफी हंगामेदार रहा। शनिवार को सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार को चौतरफा घेरते हुए राज्य में हो रहे अवैध खनन और प्रशासनिक विफलताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि राज्य में बालू, पत्थर, कोयला और लोहे की खुलेआम चोरी हो रही है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चपत लग रहा है।
मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
सदन को संबोधित करते हुए मरांडी ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जब गृह, ऊर्जा और खनन जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर चर्चा हो रही है, जो स्वयं मुख्यमंत्री के पास हैं तो उन्हें सदन में मौजूद रहकर विपक्ष की बातें सुननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन कई जगहों पर कोयला चोरी रोकने में नाकाम रहा है और उसे पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है।
भर्ती में मौत और मुआवजे का मुद्दा
उत्पाद विभाग की भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए बाबूलाल मरांडी ने दुख जताया कि दौड़ के दौरान 15 युवाओं की मौत हो गई, लेकिन सरकार ने अब तक उनके परिजनों को कोई मुआवजा नहीं दिया। उन्होंने ACB की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण दोषी अधिकारियों को आसानी से बेल मिल रही है।
जल जीवन मिशन और बिजली विभाग में घोटाला
मरांडी ने केंद्र सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ योजना की राज्य में बदहाली पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फर्जी खातों के जरिए विभाग में तीन करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई है और एक चौथाई गांवों तक भी नल का पानी नहीं पहुँच पाया है। ऊर्जा विभाग पर हमला बोलते हुए उन्होंने खुलासा किया कि विभाग के खातों से 160 करोड़ रुपये की एफडी (FD) गायब है, जिस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बड़े घोटालों पर पर्दा डाला जा रहा है, जबकि गरीब उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी के केस लादे जा रहे हैं।
सुरक्षा पर एनसीआरबी का हवाला
राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए उन्होंने एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार हत्या की दर के मामले में झारखंड देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने धनबाद और रांची में गैंगस्टरों के बढ़ते प्रभाव और खुलेआम रंगदारी की घटनाओं पर पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि यदि योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी बरती जाए, तभी झारखंड का वास्तविक विकास संभव है।

