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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन बिजली की बदहाली और किसानों के वैश्विक व्यापार का मुद्दा छाया रहा। सदन में डुमरी विधायक जयराम महतो ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवालिया निशान लगाए, वहीं विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के कृषि और वन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ‘मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला’ (Quality Testing Lab) की आवश्यकता पर जोर दिया।
पैसे देने के बाद भी अंधेरे में क्यों रहें उपभोक्ता
सदन में जयराम महतो ने आम आदमी का दर्द बयां करते हुए कहा कि गांवों में एक बार ट्रांसफार्मर जल जाए या तार टूट जाए, तो हफ्तों तक बिजली बहाल नहीं होती। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया, “उपभोक्ता आखिर शिकायत कहाँ करें? क्या कोई समय सीमा तय है?” इस मुद्दे पर हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि बिजली कोई ‘खैरात’ नहीं है, लोग इसके लिए बिल भरते हैं। उन्होंने मांग की कि ट्रांसफार्मर जलने के 24 घंटे के भीतर उसे बदलने की अनिवार्य व्यवस्था होनी चाहिए।
मंत्री का कबूलनामा
विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन में स्वीकार किया कि विभाग के पास ट्रांसफार्मर का स्टॉक कम है, जिस कारण देरी होती है। हालांकि, उन्होंने राहत देते हुए घोषणा की कि शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा। फिलहाल उपभोक्ता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर या डिवीजन ऑफिस में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कटहल और महुआ को वैश्विक बाजार दिलाने की मांग
विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए एक दूरगामी विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में अदरक, महुआ, कटहल और टमाटर जैसे उत्पादों की भरमार है, लेकिन गुणवत्ता जांच के लिए लैब न होने के कारण इन्हें वैश्विक बाजार नहीं मिल पाता।
उन्होंने सुझाव दिया कि:
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रांची और देवघर एयरपोर्ट पर Standard Quality Labs स्थापित की जाएं।
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राज्य के उत्पादों की मैपिंग कर निर्यात की संभावनाएं तलाशी जाएं।
जवाब में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि केंद्र सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है और राज्य सरकार भविष्य में अपनी ओर से भी इस दिशा में कदम उठाएगी।

