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Bhubaneswar: ओडिशा की हसीन वादियों में एक ऐसा प्राचीन खजाना छिपा है, जिसकी उम्र का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। हम बात कर रहे हैं सुंदरगढ़ जिले के हेमगिर स्थित ‘छेंगा पहाड़’ की। यहां प्रकृति ने अपने हाथों से एक ऐसा अद्भुत मेहराब (Natural Arch) तराशा है, जो देखने में किसी मानव निर्मित वास्तुकला जैसा प्रतीत होता है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने इस दुर्लभ चट्टान को ‘भू-विरासत’ (Geo-heritage) का दर्जा दिया है, और माना जाता है कि ये चट्टानें डायनासोर के युग की यानी करीब 16 करोड़ साल पुरानी हैं।
वैज्ञानिकों के लिए अजूबा, पौराणिक कथाओं का केंद्र — भूवैज्ञानिकों के अनुसार, अंडाकार आकृति वाले इस मेहराब की आधार लंबाई 30 मीटर और ऊंचाई 12 मीटर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भीषण मौसम और समय के थपेड़ों को झेलने के बावजूद आज भी अपने मूल स्वरूप में खड़ा है। विज्ञान से इतर, इस स्थान का गहरा नाता रामायण काल से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, जब भगवान राम स्वर्ण मृग का पीछा कर रहे थे, तब उनके द्वारा चलाए गए एक बाण ने इस पहाड़ी को चीर दिया था, जिससे यह छेद (मेहराब) बन गया और बाण पहाड़ के दूसरी ओर जा गिरा।
ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीनों की पहली पसंद — छेंगा पहाड़ तक पहुंचना किसी रोमांचक सफर से कम नहीं है। पर्यटकों को उबड़-खाबड़ रास्तों और घने जंगलों के बीच ट्रैकिंग करते हुए यहां पहुंचना पड़ता है। चूंकि यह स्थान कनिका पर्वतमाला के वन प्रभाग के भीतर स्थित है, इसलिए यहां आधुनिक सुख-सुविधाओं का अभाव है। जो सैलानी यहां आते हैं, उन्हें अपनी जरूरत का सामान और पानी साथ लेकर चलना पड़ता है। ऊंचाइयों से दिखने वाले हरे-भरे नजारे और करोड़ों साल पुरानी चट्टानों का स्पर्श पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अहसास कराता है।
सावधानी और यात्रा के नियम — इस दुर्गम स्थल की यात्रा करने वाले पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे बारिश के मौसम में यहां जाने से बचें, क्योंकि पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो जाते हैं। साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से अकेले जाने के बजाय समूह में जाना बेहतर होता है। ओडिशा का यह प्राचीन मेहराब न केवल देश, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जो धरती के करोड़ों साल पुराने इतिहास को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं।
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