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Washington, (US): मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और सैन्य कार्रवाई के बीच व्हाइट हाउस ने एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण कूटनीतिक रुख अपनाया है। ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान की किसी भी ‘नई और उदारवादी’ सरकार के साथ मेज पर बैठने और ऐतिहासिक समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु ठिकानों पर हालिया हमलों के बाद वहां की राजनीतिक स्थिरता को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।
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वॉशिंगटन की इस रणनीति का सीधा उद्देश्य तेहरान को ‘सामान्य देश’ के मानकों पर लाना है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अगर ईरान की भविष्य की लीडरशिप क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनने को तैयार होती है, तो हमारे दरवाजे पूरी तरह खुले हैं।” हालांकि, यह दोस्ती इतनी आसान नहीं होगी; इसके लिए अमेरिका ने तीन बुनियादी शर्तें रखी हैं:
1. परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण विराम: ईरान को हथियार-ग्रेड यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह छोड़ना होगा और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों की कड़ी निगरानी स्वीकार करनी होगी।
2. मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी वॉर: पड़ोसी देशों के लिए खतरा बनी बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास रोकना होगा और मिडिल ईस्ट में सक्रिय उग्रवादी गुटों (Proxies) को मिल रहा समर्थन खत्म करना होगा।
3. क्षेत्रीय सामंजस्य: ईरान को एक ‘सामान्य राष्ट्र’ की तरह व्यवहार करना होगा जो अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखे।
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क्या है ‘बैन रिलीफ पैकेज’? अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि नई सरकार इन शर्तों पर अमल करती है, तो ट्रंप प्रशासन एक बड़े ‘इकोनॉमिक सपोर्ट पैकेज’ की पेशकश कर सकता है। इसमें तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील और विदेशी निवेश का रास्ता खोलना शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने यह प्रस्ताव भी दिया है कि अगर ईरान घरेलू संवर्धन बंद करता है, तो उसे नागरिक उपयोग (Civilian Energy) के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु ईंधन उपलब्ध कराया जा सकता है।
अब गेंद तेहरान के पाले में है। क्या ईरान की भावी लीडरशिप इस कूटनीतिक अवसर को भुनाकर अपनी अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी देगी, या संघर्ष का यह रास्ता और लंबा खिंचेगा? पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं।

