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रांची: राजधानी में बेतरतीब और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ रांची नगर निगम (RMC) ने अब कमर कस ली है। शहर की सूरत बिगाड़ने वाले अवैध ढांचों और नक्शा विचलन (Map Deviation) के मामलों पर नकेल कसने के लिए निगम ने एक बड़ा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। 26 फरवरी 2026 को नगर निगम के प्रशासक सुशांत गौरव की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में अवैध निर्माणों को लेकर कई कड़े फैसले लिए गए।
G+2 और बहुमंजिला इमारतों की ज़ोनवार जांच
प्रशासक ने स्पष्ट आदेश दिया है कि शहर के सभी G+2 (तीन मंजिला) और उससे ऊंचे बहुमंजिला भवनों की सघन जांच की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग ज़ोन के हिसाब से विशेष टीमों का गठन किया गया है। यदि कोई भी भवन स्वीकृत नक्शे के बिना या नियमों के विरुद्ध बनता पाया गया, तो उस पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
गिफ्ट डीड और अतिक्रमण पर ‘युद्धस्तर’ पर कार्रवाई
शहर में अक्सर देखा जाता है कि व्यावसायिक और आवासीय भवनों के लिए छोड़ी गई गिफ्ट डीड (निगम को समर्पित भूमि) की जमीन पर भी लोग निर्माण कर लेते हैं। प्रशासक ने इसे गंभीरता से लेते हुए ऐसी जमीनों की जांच ‘युद्धस्तर’ पर करने का निर्देश दिया है। यदि ऐसी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो उसे तुरंत ध्वस्त किया जाएगा।
नक्शा पास होने के बाद ही शुरू होगा काम
अब भवन निर्माण शुरू करने से पहले केवल नक्शा होना काफी नहीं है। प्रशासक सुशांत गौरव ने कहा कि निर्माण शुरू करने से पहले BPAMS (Building Plan Approval Management System) के माध्यम से ‘कार्य प्रारंभ प्रमाण पत्र’ (Commencement Certificate) जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, वायु प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण स्थल पर ग्रीन नेट का उपयोग करना भी ज़रूरी कर दिया गया है।
शिकायत मिलते ही बिल्डिंग होगी सील
निगम ने जनता से अपील की है कि वे अवैध निर्माण की जानकारी साझा करें। अवैध ढांचे की शिकायत सही पाए जाने पर भवन को तुरंत सील करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, पुराने और नए सभी स्वीकृत नक्शों का एक कंसोलिडेटेड डेटाबेस तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी विचलन को आसानी से पकड़ा जा सके।
इस बैठक में उप प्रशासक गौतम प्रसाद साहु, नगर निवेशक राम बदन सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद थे। निगम की इस सख्ती से उन बिल्डरों और मकान मालिकों में हड़कंप है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य शुरू किया है।

