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रांची/नई दिल्ली: झारखंड सरकार के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पारित एक अंतरिम आदेश के क्रियान्वयन और संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह मामला राज्य सरकार द्वारा दायर स्पेशल लीव टू अपील (Crl.) No(s). 3684/2026 से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
यह कानूनी विवाद झारखंड हाईकोर्ट में लंबित WPCR No. 4238/2026 से उपजा है, जिसमें हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को एक अंतरिम आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ ‘द स्टेट ऑफ झारखंड’ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर ‘स्टे’ (Stay) लगा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई जोरदार पैरवी
26 फरवरी 2026 को इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ (Coram) में हुई। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा के नेतृत्व में वकीलों की एक बड़ी टीम ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद विपक्षी पार्टी (मनोज टंडन व अन्य) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
अदालत का फैसला और अगली कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा “अगली सुनवाई तक, विवादित (Impugned) आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक रहेगी।” अदालत ने नोटिस जारी करते हुए इसे चार सप्ताह के भीतर जवाब देने योग्य (Returnable) बनाया है। इसका मतलब है कि अब अगले एक महीने तक हाईकोर्ट का वह आदेश निष्प्रभावी रहेगा जिसने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी थीं।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत है। अब सरकार को अपनी दलीलें और पुख्ता तरीके से शीर्ष अदालत के सामने रखने का समय मिल गया है। इस आदेश की प्रतियां सहायक रजिस्ट्रार सोनिया भसीन और रंजना शैले द्वारा प्रमाणित की गई हैं।

