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Health News: भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक जकड़न और मानसिक तनाव एक आम समस्या बन गई है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों समस्याओं का एक प्रभावी समाधान ‘पादहस्तासन’ (या प्रसारित पादोत्तानासन) में छिपा है। पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुकने वाली यह मुद्रा शरीर की प्रमुख मांसपेशियों में गहरा खिंचाव पैदा करती है, जिससे न केवल शरीर में लचीलापन आता है, बल्कि मन भी गहराई से शांत होता है।
अभ्यास की सही विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
योगाचार्यों के अनुसार, इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हों। इसके बाद:
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अपने पैरों के बीच लगभग 3 से 5 फीट (अपनी लंबाई के अनुसार) की दूरी बनाएं।
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एड़ियों को थोड़ा बाहर और अंगूठों को अंदर की ओर रखें ताकि संतुलन बना रहे।
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अब हाथों को कमर पर रखें और लंबी गहरी सांस लेते हुए छाती को ऊपर की ओर तानें।
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सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर के जोड़ से आगे की ओर झुकें। इस स्थिति में अपनी क्षमता अनुसार रुकें और फिर सांस लेते हुए सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं।
शारीरिक और मानसिक लाभों का खजाना
पादहस्तासन का नियमित अभ्यास शरीर के निचले हिस्से—जांघों, कूल्हों और टखनों को मजबूती प्रदान करता है। रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आने से पीठ दर्द की समस्या में राहत मिलती है। पेट पर पड़ने वाले दबाव के कारण यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और कब्ज जैसी परेशानियों को दूर करता है। इस आसन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि झुकते समय सिर नीचे होने से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह तेज होता है, जो तनाव, थकान और चिंता को कम कर एकाग्रता बढ़ाता है।
सावधानियां हैं जरूरी
हालांकि यह आसन अत्यंत लाभकारी है, लेकिन कुछ स्थितियों में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। हाई या लो ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा (मोतियाबिंद), रीढ़ की गंभीर चोट या घुटने की समस्या से जूझ रहे लोगों को यह आसन योग विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इस आसन के दौरान विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास करना चाहिए।
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