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Career Desk: आजकल बेहतर स्वास्थ्य के लिए लोगों का रुझान होम्योपैथी की ओर तेजी से बढ़ा है। इन दवाओं के कोई दुष्प्रभाव (side effects) न होने के कारण न केवल मरीजों का भरोसा बढ़ा है, बल्कि दुनियाभर में पेशेवर होम्योपैथिक डॉक्टरों की मांग भी काफी ज्यादा हो गई है। यही कारण है कि चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है।
प्रवेश के लिए क्या है योग्यता?
जो छात्र होम्योपैथिक डॉक्टर बनना चाहते हैं, उनके लिए 12वीं कक्षा विज्ञान विषय (Physics, Chemistry, Biology) के साथ पास होना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के लिए कम से कम 50 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 45 फीसदी अंक होना जरूरी है। उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 साल होनी चाहिए। बता दें कि अधिकांश प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए ‘नीट’ (NEET) परीक्षा पास करना आवश्यक है, हालांकि कुछ संस्थान अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं भी आयोजित करते हैं।
कोर्स के विभिन्न विकल्प
होम्योपैथी के क्षेत्र में छात्र अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग अवधि के कोर्स चुन सकते हैं:
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सर्टिफिकेट कोर्स: इनकी अवधि 3 से 6 महीने की होती है।
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डिप्लोमा कोर्स: डिप्लोमा इन इलेक्ट्रो-होम्योपैथी मेडिसिन जैसे कोर्स 1 से 2 साल के होते हैं।
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डिग्री कोर्स (BHMS): बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) सबसे लोकप्रिय कोर्स है। इसकी अवधि 5.5 साल (4.5 साल पढ़ाई + 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप) होती है। इसमें शरीर विज्ञान और चिकित्सा की उन्नत शाखाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
करियर की अपार संभावनाएं
होम्योपैथी का उपयोग माइग्रेन, अवसाद, गठिया, एलर्जी, और पुराने रोगों (Chronic diseases) के इलाज में प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर यह चिकित्सा पद्धति समान रूप से असरदार है। डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद छात्र सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा, खुद का क्लीनिक खोलना, रिसर्च क्षेत्र में जाना या फार्मास्युटिकल कंपनियों में सलाहकार के तौर पर काम करना भी एक शानदार करियर विकल्प है।
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