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Nairobi, (Kenya): पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या इस समय पिछले कई दशकों के सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में स्थिति बेकाबू होती जा रही है। सूखे की इस भयावह मार के कारण केन्या में 20 लाख से ज्यादा लोग भुखमरी का शिकार हो चुके हैं।
मंडेरा में स्थिति नाजुक
केन्या के राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन प्राधिकरण ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि देश के करीब 10 जिले इस संकट की चपेट में हैं। सोमालिया की सीमा से सटे मंडेरा जिले में स्थिति “चेतावनी” स्तर पर पहुंच गई है। यहां पानी की बूंद-बूंद के लिए संघर्ष जारी है, जिसके चलते बड़ी संख्या में दुधारू पशुओं और अन्य मवेशियों की मौत हो रही है। इस संकट का सबसे बुरा असर मासूम बच्चों पर पड़ रहा है, जो तेजी से कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
पड़ोसी देशों तक फैला संकट
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि यह केवल केन्या की समस्या नहीं है। सोमालिया, तंजानिया और युगांडा जैसे पड़ोसी देश भी इसी तरह के मौसम और पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। सोमाली सीमा के पास से सामने आई तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं, जहां सड़कों और खेतों में कंकाल बन चुके मवेशी दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन है मुख्य कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से जूझ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल गया है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच होने वाली बारिश, जिसे खेती और जल भंडारण के लिए मुख्य माना जाता था, अब तक के सबसे सूखे दौर में दर्ज की गई है। बारिश के मौसम की अवधि छोटी होने और तापमान बढ़ने से प्राकृतिक जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे भविष्य में स्थिति और भी गंभीर होने की आशंका है।

