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New Delhi: देश के पांच राज्यों में सियासी पारा अब उफान पर आने वाला है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने कमर कस ली है और संकेत मिल रहे हैं कि अगले महीने यानी मार्च के पहले सप्ताह के बाद कभी भी चुनावी तारीखों का एलान हो सकता है। लोकतंत्र के इस सबसे बड़े उत्सव के लिए आयोग जल्द ही राज्यों का दौरा शुरू करने जा रहा है, ताकि जमीन पर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी का जायजा लिया जा सके।
इन राज्यों में होगी अग्निपरीक्षा
साल 2026 की यह चुनावी जंग पश्चिम बंगाल (294 सीटें), तमिलनाडु (234 सीटें), केरल (140 सीटें), असम (126 सीटें) और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी (30 सीटें) में लड़ी जाएगी। संवैधानिक मर्यादा के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होने से पहले नई सरकार का गठन जरूरी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल सबसे पहले 7 मई को खत्म हो रहा है, इसलिए आयोग का विशेष फोकस कोलकाता पर रहने वाला है। इसके बाद मई के मध्य तक तमिलनाडु, केरल और असम की विधानसभाओं का भी समय पूरा हो रहा है।
EC का एक्शन प्लान: दौरों और बैठकों का दौर
आयोग की टीम फरवरी के आखिरी दिनों से राज्यों का दौरा शुरू करेगी। इस दौरान राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) के साथ मैराथन बैठकें होंगी। केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि आयोग राजनीतिक दलों से भी आमने-सामने बात करेगा ताकि चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जा सके।
बिहार चुनाव के पैटर्न पर नजर
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों के अनुभव को देखें, तो आयोग ने पूरी प्रक्रिया को 42 दिनों के भीतर समेट लिया था। इसी तर्ज पर इन पांच राज्यों में भी मार्च में घोषणा और अप्रैल-मई के बीच मतदान की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में अब बस इस बात का इंतजार है कि दिल्ली के विज्ञान भवन से कब प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई जाती है। पार्टियों ने अपने झंडे और एजेंडे तैयार कर लिए हैं, अब बस चुनावी तारीखों की मुहर लगनी बाकी है।
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