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Home»India»युवाओं पर कर्ज का जाल, बुजुर्गों के पास है माल; देश में ‘सिल्वर इकोनॉमी’ का उदय!
India

युवाओं पर कर्ज का जाल, बुजुर्गों के पास है माल; देश में ‘सिल्वर इकोनॉमी’ का उदय!

भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा उलटफेर! जहां युवा कर्ज और EMI के बोझ तले दबे हैं, वहीं बुजुर्ग 100 अरब डॉलर की 'सिल्वर इकोनॉमी' के इंजन बन रहे हैं। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
By Samsul HaqueJanuary 14, 20264 Mins Read
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Lifestyle News: भारत की अर्थव्यवस्था एक दिलचस्प और अनोखे मोड़ से गुजरते हुए नए-नए करिश्में करती दिख रही है। इस दौर में जबकि युवाओं में बचत करने की जगह खर्च करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है तो वहीं बुजुर्गों ने बचत फार्मूले के जरिए आर्थिक स्थिरता की रीढ़ बनने का अनोखा कारनामा करके दिखा दिया है। अर्थशास्त्रियों ने इस प्रवृत्ति को सिल्वर इकोनॉमी का नाम दिया है। 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग अब उपभोग, निवेश और बचत—तीनों स्तरों पर अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

इस खबर को भी पढ़ें : इन 5 लोगों के हाथ में है दुनिया की कमान: अर्थव्यवस्था से लेकर युद्ध तक असर

एक अहम जानकारी के मुताबिक देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आसान कर्ज की उपलब्धता ने युवा वर्ग को ‘ईएमआई कल्चर’ में जकड़ कर रख दिया है। बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग का औसत कर्ज 42 फीसद तक बढ़ गया है। मोबाइल, कार, फैशन और ऑनलाइन शॉपिंग जैसे खर्चों ने युवाओं की बचत को लगभग समाप्त कर दिया है। आय में धीमी वृद्धि और खर्चों की तेज़ रफ्तार ने उन्हें उधारी की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बना दिया है, जो कर्ज पर निर्भर है और बचत रहित जीवनशैली की ओर बढ़ रहा है।

उपभोग और निवेश का केंद्र बने बुजुर्ग

इस चलन के विपरीत, बुजुर्गों ने इस कार्यकाल में आय का 25-30 फीसद तक का हिस्सा बचत में रखा। उनके पास पेंशन, ब्याज और संपत्ति से स्थिर आय स्रोत हैं। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल घरेलू बचत का लगभग 22 फीसद हिस्सा 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के पास है। यही वर्ग अब उपभोग और निवेश दोनों का बड़ा केंद्र बन गया है, जिस पर अब बाजार की नजरें टिकी हैं।

सिल्वर मार्केट की मांग और उद्योग जगत

बुजुर्गों को केंद्र में रख कर हेल्थकेयर, वेलनेस, फार्मा, बीमा और रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से काम कर रहे हैं। लो-शुगर फूड्स, जॉइंट केयर सप्लीमेंट्स, ब्लड प्रेशर व मेमोरी बूस्टर दवाएं, सीनियर-फ्रेंडली हाउसिंग और तीर्थ-यात्रा आधारित टूरिज्म जैसे क्षेत्र नई मांगें पैदा कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, बुजुर्गों के लिए विशेष आवासीय सोसाइटी की मांग में 28 फीसद वृद्धि हुई है, जबकि वेलनेस टूरिज्म में 40 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बुजुर्गों की डिजिटली बदलाव में सक्रियता

तकनीक से दूर समझे जाने वाले बुजुर्ग अब डिजिटल इकोनॉमी के सक्रिय खिलाड़ी बन उभरे हैं। वे यूपीआई, ऑनलाइन दवा खरीद, ई-हेल्थ कंसल्टेशन और ऑनलाइन निवेश योजनाओं में भाग लेने लगे हैं। बाजार की कंपनियां इस वर्ग को आकर्षित करने के लिए नई मार्केटिंग रणनीतियां बना रही हैं, जिससे डिजिटल इंडिया को भी अप्रत्यक्ष रूप से बूस्ट मिल रहा है।

बुजुर्ग दे रहे सामाजिक बदलाव का संकेत

आमतौर पर पहले जो बुजुर्ग परिवार में आश्रित सदस्य माने जाते थे, वे अब परिवार की वित्तीय रीढ़ बन गए हैं। कई घरों में बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और स्वास्थ्य का दारोमदार बुजुर्गों की पेंशन और बचत पर है। यह सामाजिक संरचना में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है- जहां अनुभव और स्थिरता फिर से सम्मान पा रहे हैं।

क्या कहता है नीति आयोग

भारत सरकार ने भी इस उभरते क्षेत्र की क्षमता को देखते हुए 2024 में सिल्वर इकोनॉमी पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी की थी। इसमें वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार अवसरों और वित्तीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपाय शामिल हैं। नीति आयोग का अनुमान है कि 2030 तक भारत की सिल्वर इकोनॉमी 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जिसमें स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं प्रमुख योगदान देंगी।

आर्थिक असंतुलन की आशंका

हालांकि इस आर्थिक परिवर्तन का दूसरा पहलू चिंताजनक है, युवा वर्ग की घटती बचत और बढ़ता कर्ज। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में युवाओं की आर्थिक निर्भरता बुजुर्गों पर और बढ़ेगी, जो सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को जन्म दे सकती है।

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