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World News: ईरान में इस वक्त जो हालात हैं, उसे सुनकर रूह कांप जाएगी। वहां की सरकार (खामेनेई शासन) ने अपनी ही जनता पर ऐसा जुल्म ढाया है कि पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। पिछले 84 घंटों से वहां न फोन चल रहा है और न इंटरनेट। लोग अपने सगे-संबंधियों की आवाज सुनने को तरस गए हैं, मानो पूरे देश को ‘डिजिटल जेल’ में तब्दील कर दिया गया हो।
544 लाशें और 10 हजार गिरफ्तारियां: शमशान बना ईरान!
शुरुआत में खबर थी कि 100-150 लोग मारे गए हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों ने जो आंकड़े दिए हैं, उसने दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। प्रदर्शनों में अब तक 544 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें 8 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। भईया, हद तो तब हो गई जब प्रदर्शनकारी बच्चों को निशाना बनाकर विस्फोटक फेंके गए। गिरफ्तार होने वालों की संख्या 10,681 के पार पहुँच चुकी है, जेलें ठसाठस भरी हुई हैं और सड़कों पर सिर्फ चीख-पुकार है।
ट्रंप की ‘सैन्य घुड़की’ और ईरान का सरेंडर?
इस कनकनी (तनाव) के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है और इसी डर से ईरानी नेताओं ने फोन घुमाया है और बातचीत की गुहार लगाई है। हालांकि, ईरानी संसद के स्पीकर ने भी पलटवार किया है कि अगर अमेरिका घुसा तो वो उनके मिलिट्री बेस को उड़ा देंगे। लेकिन जिस तरह से इंटरनेट ब्लैकआउट किया गया है, उससे साफ है कि खामेनेई सरकार अंदर ही अंदर डरी हुई है और सच को दुनिया से छिपाना चाहती है।
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