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India News: दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों की दौड़ हमेशा से ही चर्चा का विषय रही है। अक्सर लोग परमाणु बमों की गिनती को ही असली ताकत मान लेते हैं, लेकिन आधुनिक युद्ध नीति कहती है कि असली विजेता वह नहीं जिसके पास ज्यादा बम हैं, बल्कि वह है जो सबसे तेजी और अचूक तरीके से हमला कर सके। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की 2025 की ताजा रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारत ने परमाणु शक्ति के मामले में पाकिस्तान पर एक बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है।
गिनती का गणित और भारत का ‘क्वालिटी’ वार
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 तक भारत के पास 180 परमाणु हथियार हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170। हालांकि संख्या में यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं दिखता, लेकिन असली खेल तकनीक और मारक क्षमता का है। चीन 600 हथियारों के साथ भारत से संख्या में जरूर आगे है, लेकिन भारत जिस तेजी से अपने शस्त्रागार का आधुनिकीकरण कर रहा है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।
क्या है ‘कैनिस्टर’ तकनीक, जिसने पाकिस्तान को पछाड़ा?
भारत की पुरानी नीति में परमाणु हथियार और उनके लॉन्चर अलग-अलग रखे जाते थे, जिससे हमला करने में समय लगता था। लेकिन 2024-25 में भारत ने अपनी रणनीति में ‘गुणात्मक’ बदलाव किया है। अब भारत की मिसाइलें ‘कैनिस्टर्स’ (Canisters) में सील रहती हैं।
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हमेशा तैयार: ये मिसाइलें ‘रेडी टू लॉन्च’ मोड में होती हैं।
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सुरक्षा: कैनिस्टर में सील होने के कारण इन्हें कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है और ये बाहरी वातावरण से सुरक्षित रहती हैं।
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त्वरित प्रहार: दुश्मन के हमले की स्थिति में भारत अब पलक झपकते ही जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जो पाकिस्तान की पुरानी तकनीक के मुकाबले कहीं अधिक घातक है।
सुरक्षा पर उठते सवाल: भारत बनाम पाकिस्तान
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियार सुरक्षित हाथों में हैं? वहां की राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथ के बीच परमाणु हथियारों का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके विपरीत, भारत का परमाणु नियंत्रण कमान पूरी तरह से नागरिक नेतृत्व (Civilian Leadership) के अधीन है और दुनिया भारत के ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) के साथ-साथ उसकी सुरक्षा प्रणालियों पर अटूट भरोसा करती है।
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कुल मिलाकर, भारत अब केवल बमों की गिनती बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि वह अपनी ‘सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ (Second Strike Capability) को इतना मजबूत बना चुका है कि दुश्मन परमाणु हमले की सोचने से भी डरेगा।

