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World News: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर स्थित बॉन्डी बीच पर हुए हमले, जिसमें यहूदी समुदाय को निशाना बनाया गया, ने एक बार फिर आतंकवाद के वैश्विक खतरे और उसकी जड़ों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले और भारत के पहलगाम में हुए हमले के बीच की समानताएं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चौंकाने वाली स्थिति दर्शाती हैं। दोनों ही हमलों के मूल में कथित तौर पर पाकिस्तानी हमलावरों का होना इस बात की पुष्टि करता है कि आतंकवाद की जड़ें एक ही जगह से निकल रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का खतरनाक पैटर्न: बॉन्डी बीच और पहलगाम हमले में समान पाकिस्तानी कनेक्शन पर बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के अनुसार, बॉन्डी बीच पर गोलीबारी करने वालों में 50 वर्षीय साजिद और उसका 24 वर्षीय बेटा नवीद अकरम शामिल थे। साजिद 1998 में पाकिस्तान से ऑस्ट्रेलिया आया था, जबकि उसका बेटा नवीद अकरम पाकिस्तानी नागरिक था जो सिडनी में रह रहा था। हालांकि, सिडनी में पाकिस्तान के महावाणिज्यदूत ने गलत पहचान किए गए एक अन्य पाकिस्तानी मूल के नागरिक के बारे में स्पष्टीकरण दिया था, लेकिन इन हमलावरों के पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच अभी भी जारी है।
ट्रंप का रुख और रक्षा पैकेज पर सवाल
बॉन्डी बीच हमले के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे ‘भयानक’ और ‘स्पष्ट रूप से एक यहूदी-विरोधी हमला’ बताया। ट्रंप ने हनुक्का मना रहे यहूदी अमेरिकियों से गर्व के साथ जश्न मनाने का आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। ट्रंप ने इस दौरान एक बहादुर नागरिक अहमद अल अहमद की भी प्रशंसा की, जिसने हमलावरों में से एक को बहादुरी से काबू करके कई लोगों की जान बचाई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी यहूदी-विरोध की कड़ी निंदा की।
पहलगाम और बॉन्डी बीच हमले में समानताएं:
दोनों ही हमलों में मासूम और निर्दोष लोगों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। पहलगाम में हिंदू श्रद्धालुओं को, और बॉन्डी बीच पर हनुक्का मना रहे यहूदी समुदाय को। दोनों ही मामलों में हमलावरों के तार या तो सीधे पाकिस्तान से जुड़े थे या उनकी मानसिकता को पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों से प्रेरित माना जाता है।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले की निंदा कर इसे यहूदी-विरोधी हमला कहा है, लेकिन पाकिस्तान को दिए गए रक्षा पैकेज पर उनके प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।
हमले की अमेरिका द्वारा कड़ी निंदा की गई है। ऑस्ट्रेलिया और भारत, दोनों क्वाड (QUAD) सदस्य होने के कारण, अमेरिका के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। यहूदी समुदाय को निशाना बनाए जाने के कारण इस हमले को अमेरिका गंभीरता से ले रहा है। अमेरिका पारंपरिक रूप से इजरायल का मजबूत सहयोगी रहा है, और इस हमले को यहूदी-विरोधी आतंकवाद के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए, आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का बयान इजरायल के पक्ष में है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान पर सीधे सैन्य कार्रवाई करने के बजाय, अमेरिका उस पर आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ा सकता है। इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रति ट्रंप प्रशासन का आगामी रुख और रक्षा पैकेज पर लिया गया निर्णय वैश्विक कूटनीति के लिए अहम मोड़ साबित होगा।

