अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Ranchi : झारखंड में मदरसा आलिम एवं फाजिल डिग्री की मान्यता पर उठे विवाद को लेकर अब मामला गहराता जा रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा विधि विभाग से परामर्श मांगे जाने के बाद विधि विभाग ने इस डिग्री की स्नातक और स्नातकोत्तर के समकक्षता को असंवैधानिक करार दिया है। इस फैसले पर झारखंड छात्र संघ ने कड़ा ऐतराज जताया है।
शनिवार को रांची स्थित मदरसा इस्लामिया में छात्र संघ की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष एस. अली ने की। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के निर्देश पर ही जैक द्वारा आलिम-फाजिल परीक्षा आयोजित कर डिग्रियां दी गई थीं। अब सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर (जो 5 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड से जुड़ा था) इन्हें असंवैधानिक कहना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित होगा।
छात्र संघ ने घोषणा की कि इस मुद्दे पर निर्णायक रणनीति बनाने और आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए 30 सितंबर 2025 को गोड्डा जिला के महागामा स्थित दिग्घी मदरसा में एक महाबैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मांगों पर चर्चा होगी, जिनमें शामिल हैं –
- वर्ष 2023 में जैक द्वारा जारी आलिम एवं फाजिल डिग्री की स्नातक व स्नातकोत्तर समकक्ष मान्यता को बरकरार रखना।
- सहायक आचार्य (भाषा) पद की परीक्षा में शामिल आलिम डिग्रीधारी अभ्यर्थियों का परिणाम प्रकाशित करना।
- फाजिल डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को माध्यमिक आचार्य बहाली में शामिल करना।
- रांची विश्वविद्यालय से मौजूदा शैक्षणिक सत्र में आलिम-फाजिल डिग्री की परीक्षा आयोजित कराना।
- उर्दू शिक्षकों और भाषा से जुड़े मामलों पर व्यापक चर्चा करना।
बैठक में तय किया गया कि यदि सरकार ने छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। इस अवसर पर मो. वसीम, इरशाद आलम, एजाज आलम, मुबारक अंसारी, सुहैब राही, अब्दुल्लाह राचवी, गुलाम मुर्तजा, मो. तौसीफ समेत कई लोग मौजूद थे।

