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India News: डिजिटल वॉलेट कंपनी मोबिक्विक (MobiKwik) एक बड़े साइबर फ्रॉड की शिकार हो गई है। महज 48 घंटे के भीतर कंपनी को करीब 40 करोड़ रुपये का चूना लग गया। यह धोखाधड़ी 11 और 12 सितंबर को हुई, जब सिस्टम में आए एक तकनीकी फॉल्ट का फायदा उठाकर यूजर्स ने अपने वॉलेट से ज्यादा रकम ट्रांसफर कर ली।
जांच में पता चला कि इन दो दिनों में लगभग 5 लाख ट्रांजेक्शन हुए। चौंकाने वाली बात यह रही कि गलत पिन डालने के बावजूद पैसे ट्रांसफर हो रहे थे। इसी खामी का इस्तेमाल कर ठगों ने बड़ी रकम उड़ा ली। कुल 40.2 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है।
पुलिस ने अब तक 2,500 बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें यह पैसे ट्रांसफर हुए। इनमें से करीब 8 करोड़ रुपये वाले खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है—रेहान, वकार यूनुस, वसीम अकरम, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद अंसार और मोहम्मद साकिल। इनमें से पांच आरोपी नूंह और एक पलवल का रहने वाला है। गिरफ्तार आरोपियों से कुल 9 लाख रुपये बरामद हुए हैं। फिलहाल सभी न्यायिक हिरासत में भेजे जा चुके हैं।
पुलिस का कहना है कि धोखाधड़ी की जानकारी स्कैम करने वालों तक कैसे पहुंची, इसकी जांच जारी है। आशंका जताई जा रही है कि कंपनी का कोई कर्मचारी भी इस रैकेट में शामिल हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। नूंह पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि 11 या 12 सितंबर को उनके खाते में बिना वजह पैसे आए हैं, तो वे 23 सितंबर तक इसकी जानकारी पुलिस को दें।
कंपनी की ओर से भी बयान आया है। मोबिक्विक (MobiKwik) प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी हर संभव तरीके से यह रकम वापस लाने की कोशिश कर रही है। अब तक करीब 14 करोड़ रुपये रिकवर किए जा चुके हैं। यानी कंपनी का नेट नुकसान लगभग 26 करोड़ रुपये का है। बाक़ी रकम भी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया के जरिए वसूलने की तैयारी है।
यह पहला मौका नहीं है जब मोबिक्विक (MobiKwik) ऐसे घोटाले का शिकार हुआ है। इससे पहले अक्टूबर 2017 में भी कंपनी से 19 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। दोबारा इतनी बड़ी वारदात ने डिजिटल वॉलेट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

