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अल्लाह के 99 नाम हैं। इस्लाम में अल्लाह के इन 99 सुन्दर नामों को अस्मा-उल-हुस्ना कहा जाता है, अर्थात् “सुंदर एवं श्रेष्ठ नामों वाला”। यह विश्वास है कि ये नाम अल्लाह की विभिन्न विशेषताओं और गुणों को दर्शाते हैं, जिससे मुसलमानों की आस्था, नमाज और आध्यात्मिक जीवन में गहराई आती है। एक प्रसिद्ध हदीस में पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने कहा है: “अल्लाह के 99 नाम हैं, जो उन्हें याद करेगा (या गिन पाएगा), वह जन्नत में जाएगा।” कुरआन में भी कई आयतें हैं जिनमें अल‑अस्मा‑उल‑हुस्ना का जिक्र है जैसे: “और अल्लाह ही के लिए हैं सबसे अच्छे नाम; तो उनसे पुकारो (दुआ करो)” (सूरह अल‑आ‘राफ़ 7:180) विद्वानों का मत है कि ये 99 नाम अल्लाह की शक्ति, दया, न्याय, कृपा, सर्वोच्च सत्ता आदि गुणों को उजागर करते हैं।
अस्मा‑उल‑हुस्ना काे पढ़ना, उसके अर्थ को समझना, उन्हें बच्चों को सिखाना और उनको रोजाना ज़िक्र करना मुसलमानों में बहुत अधिक फलदायी माना गया है। वैसे तो अल्लाह का नाम लेने से ही हमारी परेशानियां कम हो जाती हैं। लेकिन, अल्लाह के विभिन्न नामों की चर्चा और उसकी तेलावत करने से इंशाअल्लाह रहमतों में कई गुणा इजाफा हो जाता है। शैतान कोसो दूर हो जाता है। बुराईयां जेहन में नहीं आती। अच्छाईयों करीब आती है और इंसान का दिल एवं दिमाग सुकून में रहता है। घर में बरकत होती है। रोजी में इजाफा होता है और सारी बलायें दूर होती हैं। आईये जानते हैं अल्लाह के विभिन्न नामों और उसकी रहमतों को-
1. अल्लाह
यह अल्लाह का जाती नाम है, जो अल्लाह के नामों में सबसे पहले आया है। अन्य सारे नाम सिफाती (गुणात्मक) हैं। कहा जाता है कि जो इंसान एक हजार बार अल्लाह पढ़ेगा, उसके मन की सारी शंकायें दूर हो जाती हैं। उसमें नये विश्वास का जन्म होता है। ला-इलाज रोगी यदि बिना गिनती किये या अल्लाह पढ़े और दुआ करे, तो इंशाअल्लाह उसकी बीमारी ठीक होगी। जो व्यक्ति जुमे के दिन नमाज से पहले पाक होकर एकांत में दो सौ बार अल्लाह पढ़े, उसकी समस्या दूर होती है।
2. अर-रहमान (बहुत दया करने वाला)
रोजाना नमाज के बाद सौ बार इसे पढ़ने से दिल से हर तरह की सख्ती और सुस्ती दूर होती है।
3. अर-रहीम (बहुत कृपा करने वाला)
प्रतिदिन नमाज के बाद सौ बार इसे पढ़ने से तमाम सांसारिक कष्टों से रक्षा होती है। साथ ही, सारी मखलूक (सृष्टि) उस पर मेहरबान होगी।
4. अल-मलिक (सबका मालिक)
रोजाना फज्र (सुबह की) नमाज के बाद इसे बिना गिने पढ़ने से व्यक्ति गनी (धनी) बनता है।
5. अल-कुद्दूस (बहुत पाक)-
रोजाना दोपहर से पहले या कुद्दूस बेहिसाब पढ़ने से दिल विकारों से पाक हो जाता है।
6. अस-सलाम-(बे-ऐब यानी निष्कलंक)
इसे बेहिसाब पढ़ने से तमाम आफतों से रक्षा होती है। इसे 115 बार पढ़कर बीमार पर फूंकने से अल्लाह उसे ठीक करते हैं। अगर इसे मरीज के सिरहाने बैठकर और दोनों हाथ उठाकर 31 बार तेज आवाज से पढ़ा जाये, ताकि मरीज सुन ले, तो इंशा अल्लाह वह मरीज ठीक होगा।
7. अल-मुमिन (ईमान देने वाला)
किसी डर के समय 630 बार इसे पढ़ने से डर एवं हानि से बचाव होता है। इस नाम को लिखकर अपने पास रखने से बंदा अल्लाह की शरण में रहता है।
8. अल-मुहैमिन (चौकसी करने वाला)
नहाकर दो रेकत नमाज पढ़ने और पाक मन से इसे सौ बार पढ़ने से अल्लाह आंतरिक और बाहरी रूप से पाक कर देंगे। इसे 115 बार पढ़ने से छिपी हुई चीजें खुलती हैं।
9. अल-अजीज (अविजयी)
इसे 40 दिन तक 40 बार पढ़ने से इज्जत में इजाफा होता है। फज्र की नमाज के बाद इसे 41 बार पढ़ने से आदर मिलेगा।
10. अल-जब्बार (सबसे शक्तिमान)
रोजाना सुबह-शाम 226 बार इसे पढ़ने से जालिमों के जुल्म से बचाव होता है। चांदी की अंगूठी पर यह नाम खुदवा कर पहनने से उसका भय व सम्मान लोगों के दिलों में पैदा होगा।
11. अल-मु-त-कब्बिर (बड़ाई और बुजुर्गी वाला)
इसे पढ़ने से इज्जत व बड़ाई में बढ़ोत्तरी होती है।
12. अल-खालिक (पैदा करने वाला)
सात दिन तक सौ बार इसे पढ़ने से तमाम आफतों (आपदाओं) से रक्षा होती है। हमेशा इसे पढ़ने से अल्लाह पाक उसके लिए एक फरिश्ता पैदा कर देते हैं, जो उसकी ओर से इबादत करता है।
13. अल-बारी (जान डालने वाला)
अगर बांझ औरत सात रोजे रखे और पानी से इफ्तार करने के बाद 21 बार अल-बारि-अल-मुसव्विर पढ़े, तो इंशाअल्लाह उसे बेटा नसीब होगा।
14. अल-मुसव्विर (आकार देने वाला)
औलाद प्राप्ति के लिए इसे अल-बारी के साथ पढ़ा जाता है।
15. अल-गफ्फार (क्षमा करने वाला)
जुमे की नमाज के बाद इसे सौ बार पढ़ने से मगफिरत (मोक्ष) के निशान जाहिर होंगे। अस्र की नमाज के बाद रोजाना या गफ्फारो इगिफरली पढ़ने से अल्लाह उसे बख्शे हुए (मोक्ष प्रदान किए हुए) लोगों में दाखिल करेंगे।
16. अल-कह्हार (सबको अपने वश में रखने वाला)
जो व्यक्ति संसार के मोह में जकड़ा हो, वह बेहिसाब इसे पढ़े। इससे उसके दिल से संसार का मोह समाप्त हो जायेगा और अल्लाह की मुहब्बद पैदा हो जाएगी। अगर चीनी के बरतन पर लिखकर ऐसे व्यक्ति को पिलाया जाए, जो कि जादू के कारण औरत के अयोग्य हो, तो जादू दूर हो जाए।
17. अल-वह्हाब (सब-कुछ देने वाला)
नमाज के आखिरी सजदे में 40 बार पढ़ने से अल्लाह गरीबी दूर करते हैं। यदि कोई विशेष इच्छा हो तो घर या मस्जिद के सहन में तीन बार सजदा करके हाथ उठाए और सौ बार पढ़े, इंशा अल्लाह इच्छा पूरी होगी।
18. अर-रज्जाक (रोजी देने वाला)
नमाज (फज्र) से पहले अपने मकान के चारों कोनों से दस-दस बार या रज्जाक पढ़कर फूंकने से अल्लाह रिज्क के दरवाजे खोलते हैं। बीमारी व गरीबी उसके घर में नहीं आयेंगी। इसे दाहिने कोने से शुरू करें और मुंह किबले की तरफ रखें।
19. अल-फत्ताह (कठिनाई दूर करने वाला)
फज्र की नमाज के बाद दोनों हाथ सीने पर रखकर 71 बार इसे पढ़ने से दिल में नूरे-ईमान आयेगा। सारे कार्य व अन्न प्राप्ति आसान हो जाएगा।
20. अल-अलीम (बहुत ज्ञानी)
बेहिसाब इसे पढ़ने से इल्मो मगफिरत (ज्ञान व मोक्ष) के दरवाजे खुल जाते हैं।
21. अल-काबिध (रोजी बंद करने वाला)
इसे रोटी के चार लुक्मों पर 40 दिन लिखकर खाने से भूख, प्यास, घाव व दर्द आदि की तकलीफ में राहत मिलती है।
22. अल-बासित (रोजी खोलने वाला)
चाश्त की नमाज के बाद आसमान की तरफ हाथ उठाकर दस बार इसे पढ़ने से और मुंह पर हाथ फेरने से अल्लाह उसे गनी (धनी) बना देंगे और वह कभी किसी का मोहताज न होगा।
23. अल-खाफिध (छोटा करने वाला)
रोजाना पांच सौ बार इसे पढ़ने से अल्लाह इच्छाएं पूरी और कठिनाइयां दूर करते हैं। तीन रोजे रखने और चौथे रोज एक जगह बैठकर 70 बार इसे पढ़ने से दुश्मन पर जीत होती है।
24. अर-राफे (ऊंचा करने वाला)
प्रत्येक माह 14 वीं तारीख की आधी रात में इसे सौ बार पढ़ने से अल्लाह उसे मख्लूक (सृष्टि) से बेनियाज (अनाश्रित) और धनी कर देंगे। 70 बार रोज पढ़ने से जालिमों से बचा रहेगा।
25. अल-मोईज (इज्जत देने वाला)
पीर या जुमे के दिन मगरिब के बाद 40 बार इसे पढ़ने से अल्लाह इज्जत में इजाफा देता है।
26. अल-मुजिल्ल (अपमानित करने वाला)
75 बार इसे पढ़कर सजदे में सिर रखकर दुआ करने से अल्लाह उसको जालिमों और दुश्मनों की शरारत एवं जलन से बचाए रखेंगे। यदि कोई खास दुश्मन हो तो सजदे में उसका नाम लेकर अल्लाह से दुआ करें, दुआ कुबूल होगी। जिस का हक दूसरे के जिम्मे आता हो और वह उसे देने में टालमटोल करता हो, तो इसे बेतहाशा पढ़ा करें। वह उसका हक अदा करेगा।
27. अस-समी (सब-कुछ सुनने वाला)
जुमेरात के दिन चाश्त की नमाज के बाद इसे पांच सौ बार या 50 बार पढ़ने से दुआएं कुबूल होंगी। लेकिन, बीच में किसी से बात न करें।
28. अल-बसीर (सब-कुछ देखने वाला)
जुमे की नमाज के बाद इसे सौ बार पढ़ने से अल्लाह उसकी निगाह और दिल में नूर पैदा कर देंगे और नेक कार्यों की तौफीक होगी।
29. अल-हक-म (निर्णय करने वाला)
आखिर रात में 99 बार बा वजू या हक-म पढ़ने से अल्लाह उसके दिल में गुप्त रहस्य व नूर-भर देंगे। जुमे की रात में इसे पढ़ने से अल्लाह उसके दिल को कश्फो-इल्हाम (खुदा के छिपे राज को जान लेने) से नवाजेंगे।
30. अल-अद्ल (इंसाफ करने वाला)
जुमे के दिन या रात में रोटी के बीस या तीस टुकड़ों पर इसे लिखकर खाने से अल्लाह सृष्टि (मख्लूक) को उसके आधीन कर देंगे।
31. अल-लतीफ (कृपा करने वाला)
133 बार इसे पढ़ने से धन में वृद्धि और समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं। जो व्यक्ति गरीबी, दुख, बीमारी, तन्हाई या किसी अन्य मुसीबत में पड़ा हो, वह वजू करके दो रेकत नमाज पढ़े और अपने मकसद को दिल में रखकर सौ बार इसे पढ़े, उसका मकसद अल्लाह जरूर पूरा करेंगे।
32. अल-खबीर (जानकारी रखने वाला)
सात दिन तक इसे अनगिनत पढ़ने से छिपे हुए रहस्य खुलते हैं। अप्रिय आदत और जालिम के कब्जे से छूटकारा मिलता है।
33. अल-हलीम (धैर्यवान)
इस नाम को कागज पर लिखकर पानी से धोकर जिस वस्तु पर पानी छिड़केंगे, उसमें उन्नति होगी और वह हानि से बचा रहेगा।
34. अल-अजीम (अति महान)
इसे बेतहाशा पढ़ने से आदर व उन्नति की प्राप्ति और रोग से मुक्ति मिलती है।
35. अल-गफूर (मुक्ति देने वाला)
अनगिनत बार इसे पढ़ने से सभी कष्ट, दर्द, दुख दूर होते हैं। धन में वृद्धि होती है। जो व्यक्ति सजदे में या रब्बिग फिरली तीन बार कहे, अल्लाह उसके अगले-पिछले सभी गुनाह माफ कर देंगे।
36. अश-शकूर (आदर करने वाला)
41 बार इसे पढ़ने से दूख और थकान दूर होती है। इसे लिखकर पीने और शरीर पर फेरने से फायदा होगा। यदि आंखों से कम दिखता हो, तो लिखकर आंख पर फेरें फायदा होगा।
37. अल-अली (सबसे ऊंचा)
इसे पढ़ने और लिखकर अपने पास रखने से तरक्की, खुशहाली होगी और इच्छा पूरी होगी। यदि मुसाफिर अपने पास रखे तो वह जल्द अपने संबंधियों के पास वापस जायेगा।
38. अल-कबीर (बहुत बड़ा)
सात रोजे रखकर रोजाना एक हजार बार इसे पढ़ने से खोया हुआ अपना पद वापस मिलेगा। यदि खाने की चीज पर पढ़कर खिलाए तो पति-पत्नी में मुहब्बत होगी।
39. अल-हफीज (सबका रक्षक)
बेतहाशा इसे पढ़कर और लिखकर अपने पास रखने से हरेक प्रकार के भय व हानि से रक्षा होती है। यदि जंगली जानवरों के बीच भी सो जाए, तो कोई हानि न पहुंचे।
40. अल-मुकीत (सबको रोजी व शक्ति देने वाला)
खाली बर्तन में सात बार इसे पढ़कर फूंकने, पानी पीने या संूघने से इच्छा पूरी होती है। यदि रोजेदार मिट्टी पर इसे पढ़कर या लिखकर पानी से तर करके सूंघे तो शक्ति मिलती है। यदि यात्री मिट्टी के बर्तन पर सात बार पढ़कर या लिखकर उससे पानी पिए तो यात्रा के कष्ट से बचेगा। यदि किसी का बच्चा बुरे स्वभाव रखता हो, उसे पानी पिलाए तो स्वभाव अच्छा होगा।
41. अल-हसीब (सबकी पूर्ति करने वाला)
दुर्घटना का भय बना हो, तो जुमेरात से लगातार आठ दिन तक इसे पढ़े, हानि से रक्षा होगी।
42. अल-जलील (ऊंचे प्रभुत्व वाला)
कस्तूरी (मुश्क) व केसर (जाफरान) से इसे लिखकर अपने पास रखने से आदर, सत्कार और उन्नति बढ़ती है।
43. अल-करीम (बहुत कृपा करने वाला)
रोजाना इसे पढ़कर सोने से इल्म में इजाफा होता है।
44. अर-रकीब (बड़ी दृष्टि रखने वाला)
प्रतिदिन सात बार इसे पढ़कर अपने परिवार और धन-संपत्ति पर फूंकने से स•ाी आपदाओं से रक्षा होती है।
45. अल-मुजीब (दुआएं स्वीकार करने वाला)
इसे बेतहाशा पढ़ने से दुआ कुबूल होती है।
46. अल-वासे (बहुत अधिक देने वाला)
इसे बेतहाशा पढ़ने से आय में वृद्धि होती है।
47. अल-हकीम (बुद्धिमान)
बेतहाशा पढ़ने से बुद्धि में इजाफा होगा और अधूरे कार्य पूरे होंगे।
48. अल-वदूद (बड़ा प्रेम करने वाला)
एक हजार बार इसे पढ़कर खाने पर फूंकने और पत्नी संग खाना खाने से झगड़े खत्म होंगे एवं दिलों में मुहब्बत पैदा होगी।
49. अल-मजीद (बड़ा महान)
जो व्यक्ति किसी संक्रामक रोग जैसे आत्शिक, कोढ़ आदि से पीड़ित हो, तो वह चंद्रमास की 13, 14 और 15 वीं तारीख को रोजे रखे और इफ्तार के बाद बिना गिनती किये इसे पढ़कर पानी पर फूंककर पिए तो इंशा अल्लाह वह रोग मुक्त होगा।
50. अल-बाइस (मुर्दों को जीवित करने वाला)
रोजाना सोते समय सीने पर हाथ रखकर 101 या 122 बार पढ़ने से मन में ज्ञान भर जाएगा।
51. अश-शहीद (हर जगह उपस्थित और देखने वाला)
पत्नी या औलाद आज्ञाकारी न हो, तो सुबह उसके माथे पर हाथ रखकर इसे 21 बार पढ़कर फूंके, वे आज्ञाकारी हो जायेंगे।
52. अल-हक्क (सत्य)
वर्गाकार कागज के कोनों पर इसे लिखकर अहले सुबह हथेली पर रखकर आसमान की ओर ऊंचा करके दुआ करने से खोया हुआ व्यक्ति या सामान की प्राप्ति होती है और वह हानि से बचा रहता है।
53. अल-वकील (कार्य सफल करने वाला)
आसमानी आफत या भय के समय इसे बिना गिने पढ़ने से हानि से रक्षा होती है। हर इच्छा की पूर्ति के लिए पढ़ना लाभकारी है।
54. अल-कवी (बड़ा शक्तिमान)
जो व्यक्ति वास्तव में शत्रु द्वारा पीड़ित हो और शत्रु काफी शक्तिशाली हो, तो इसे अनगिनत बार पढ़ने से शत्रु से सुरक्षित रहेंगे। (असहनीय स्थिति के अतिरिक्त यह हरगिज न पढ़ें)।
55. अल-मतीन (मजबूत)
यदि किसी स्त्री को दूध न हो, तो इसे कागज पर लिखकर उसे धोकर पिलाने से खूब दूध होगा। कमजोर व्यक्ति इसे पढ़े तो शक्तिशाली होगा। यदि इसे किसी कुकर्मी व्यक्ति पर पढ़ा जाए, तो वह कुकर्मों को छोड़ देगा।
56. अल-वली (मदद और हिमायत करने वाला)
पत्नी की आदत अथवा व्यवहार अच्छा न हो, तो इसे पत्नी के सामने आने पर पढ़ें। उसका व्यवहार और आदत बेहतर हो जायेंगे। अधिक तकलीफ हो, तो इसे जुमे की रात एक हजार बार पढ़ें।
57. अल-हमीद (प्रशंसनीय)
जो व्यक्ति 45 दिन तक बराबर एकांत में इसे 93 बार पढ़े, उसकी सारी बुरी आदतें दूर हो जाएंगी।
58. अल-मुहसी (गणना करने वाला)
इसे रोजाना रोटी के 20 टुकड़ों पर फूंककर खाया जाये, तो सारी सृष्टि उससे प्रेम करने लगे।
59. अल-मुब्दी (पहली बार पैदा करने वाला)
जो व्यक्ति अहले सुबह गर्भवती स्त्री के पेट पर हाथ रखकर इसे 99 बार पढ़ेगा, उसका गर्भ न तो गिरेगा और न समय से पहले शिशु पैदा होगा।
60. अल-मुईद (दोबारा पैदा करने वाला)
खोए हुए व्यक्ति को वापस लाने के लिए जब घर के सारे लोग सो जायें, तो इसे घर के चारों कोनों में 70-70 बार पढ़ें। इंशा अल्लाह सात दिन में वह वापस आ जाए या उसका पता चल जाए।
61. अल-मुहयी (जीवित करने वाला)
इसे पढ़कर बीमार व्यक्ति पर फूंकने से वह रोग मुक्त होगा। 89 बार इसे पढ़कर स्वयं के ऊपर फूंकने से हर प्रकार की कैद से सुरक्षा मिलेगी।
62. अल-मुमीत (मृत्यु देने वाला)
जिस व्यक्ति का मन वश में न हो, वह सोते समय सीने पर हाथ रखकर इसे पढ़ते-पढ़ते सो जाए, मन वश में हो जाएगा।
63. अल-हैय्य (सदैव जीवित रहने वाला)
इसे रोजाना तीन हजार बार पढ़ने से व्यक्ति कभी बीमार नहीं होगा। चीनी के बर्तन पर केसर व गुलाब से इसे लिखकर पानी से धोकर पीने से रोग से छूटकारा मिलता है।
64. अल्-कैय्यूम (सबको कायम रखने और संभालने वाला)
अनगिनत बार इसे पढ़ने से लोगों में आदर होता है। यदि एकांत में बैठकर पढ़ा जाये, तो संपत्ति में वृद्धि होती है।
65. अल-वाजिद (हर वस्तु को पाने वाला)
जो व्यक्ति खाना खाते समय इसे पढ़े, उसके मन में शक्ति आयेगी।
66. अल-माजिद (आदरणीय)
जो व्यक्ति एकांत में या माजिद इतना पढ़े कि वह मूर्छित (बेखुद) हो जाए, तो उसके मन में अल्लाह के रहस्य प्रकट होने लगेंगे। यदि खाने पर पढ़कर खाएं, तो शक्ति प्राप्त होगी।
67. अल-वाहिदुल अहद (एक अकेला)
इसे एक हजार बार पढ़ने से दिल से डर निकल जाता है। जिसका औलाद न हो, वह लिखकर पास रखे इंशा अल्लाह औलाद होगी।
68. अस-समद (जिसकी कोई इच्छा न हो)
अहले सुबह सजदे में सिर रखकर 115 या 125 बार इसे पढ़ने से हरेक प्रकार की सच्चाई प्राप्त होती है। वजू करके पढ़ने से, जब तक पढ़ता रहे, भूख का असर नहीं होगा।
69. अल-कादिर (सबसे शक्तिमान)
यदि सत्य पर हो और एक हजार बार इसे पढ़े, तो उसके शत्रु खत्म होंगे। यदि किसी कार्य में बाधा आती हो, तो 41 बार पढ़ें, बाधा दूर होगी।
70. अल-मुक्तदिर (कुदरत वाला)
सोकर उठने के बाद अनगिनत बार इसे पढ़ने से कार्य सरल होंगे।
71. अल-मुकद्दिम (पहले और आगे करने वाला)
लड़ाई के समय इसे पढ़ने से वह शत्रु से आगे व सुरक्षित रहेगा। हर समय इसे पढ़ने से वह अल्लाह का आज्ञाकारी बन जाएगा।
72. अल-मुअख्खिर (पीछे और बाद में रखने वाला)
इसे सौ बार पढ़ने से अल्लाह से मुहब्बत होगी और उसकी सारी बुराईयां दूर हो जायेंगी।
73. अल-अव्वल (सबसे पहले)
पुत्र उत्पन्न न होने पर इसे 40 दिन 40 बार प्रतिदिन पढ़ें। पुत्र प्राप्ति होगी।
74. अल-आखिर (सबके बाद)
इसे एक हजार बार पढ़ने से अल्लाह के अतिरिक्त सब का प्रेम मिट जाए और उसके सभी पापों का प्रायश्चित हो जाए। उसका जीवन अंत (मृत्यु) सुखद होगा।
75. अज-जाहिर (सामने)
नमाज जुमा के बाद इसे पांच सौ बार पढ़ने से मन में अल्लाह का नूर (प्रकाश) उत्पन्न होता है।
76. अल-बातिन (गुप्त)
33 बार रोजाना इसे पढ़ने से उस पर गुप्त रहस्य प्रकट होने लगेंगे और अल्लाह की मुहब्बत उसके मन में पैदा होगी। जो व्यक्ति दो रेकत नमाज पढ़कर हो वल अव्वलो वल आखिरो वज्जाहिरो वल बातिनो व हु-व अला कुल्ले शैइन कदीर पढ़ा करे, इंशा अल्लाह उसकी सारी इच्छाएं पूरी होंगी।
77. अल-वाली (काम बनाने वाला)
इसे पढ़ने से प्राकृतिक आपदाओं (कुदरती आफतों) से रक्षा होती है। मिट्टी की कोरी सकोरी में लिखकर पानी भरकर मकान में छिड़कने से मकान सुरक्षित रहे। यदि 11 बार पढ़कर किसी पर फूंके तो वह आज्ञाकारी हो।
78. अल मु-त-आली (सबसे महान व ऊंचा)
इसे अनगिनत बार पढ़ने से समस्त कष्ट दूर होते हैं। जो स्त्री मासिक धर्म के समय में इसे पढ़े, तो उसका कष्ट दूर होता है।
79. अल-बर्र (बड़ा अच्छा व्यवहार करने वाला)
जो व्यक्ति शराब पीता हो, बलात्कार आदि बुरी आदतों में पड़ा हो, वह इसे रोजाना सात बार पढ़े। पापों से उसका मन हट जाएगा। यदि बच्चे के पैदा होते ही सात बार पढ़कर उस पर फूंकें तो बड़े होने तक वह बच्चा स•ाी आपदाओं (मुसीबतों) से सुरक्षित रहे।
80. अत-तव्वाब (क्षमा देने वाला)
चाश्त की नमाज के बाद इसे 360 बार पढ़ने से सच्ची तौबा प्राप्त होगी। अनगित बार पढ़ने से सारे कार्य सफल होंगे। यदि किसी जालिम पर 10 बार पढ़ें, तो उससे सुरक्षा प्राप्त होगी।
81. अल-मुंतकिम (बदला लेने वाला)
जो व्यक्ति सत्य पर हो और शत्रु से बदला लेने की शक्ति न रखता हो, वह तीन जुमे इसे अनगिनत बार पढ़े, अल्लाह खुद उसका बदला लेंगे।
82. अल-अफूव्व (बहुत क्षमा करने वाला)
इसे अनगिनत बार पढ़ने से अल्लाह उसे पाप मुक्त कर देंगे।
83. अर-रऊफ (बहुत बड़ा दयालु)
इसे अनगिनत बार पढ़ने से सारी सृष्टि (मखलूक) दयावान हो जाती है। रोजाना 10 बार दरूद शरीफ और इसे पढ़ें तो क्रोध दूर होगा। दूसरे क्रोधी व्यक्ति पर पढ़े, तो उसका क्रोध दूर होगा।
84. मालिक-उल-मुल्क (सम्राटों का सम्राट)
इसे पढ़ने से व्यक्ति धनी होता है। वह किसी का आश्रित नहीं रहेगा।
85. जुल-जलाल-ए-वल इकराम (महानता व इनाम देने वाला)
जो व्यक्ति अनगिनत बार इसे पढ़े अल्लाह उसको आदर-सत्कार एवं उन्नति देंगे। यदि या जल जलाल ए वल्ईकराम बेयदे कल खैर व अंत अला कुल्ले शै इन कदीर सौ बार पढ़कर पानी पर फूंककर रोगी को पिलाएं, तो वह रोग मुक्त होगा।
86. अल-मुकसित (न्याय करने वाला)
इसे रोजाना या मुकसित सौ बार पढ़ा जाये, तो व्यक्ति शैतान से सुरक्षित रहेगा। यदि सात सौ बार रोज पढ़े तो जो इच्छा हो, वह पूर्ण होगी।
87. अल-जाम्ए (सबको इकट्ठा करने वाला)
जिस व्यक्ति के परिवारजन या साथी बिछुड़ गए हों, वह फज्र के समय नहाकर आसमान की ओर मुंह करके 10 बार इसे पढ़े और एक उंगली बंद करे। इसी प्रकार हर 10 बार पर एक उंगली बंद करता जाए। अंत में दोनों हाथ, मुंह पर फेरे। बिछड़े मिल जायेंगे। यदि कोई वस्तु खो जाए तो अल्लाह-हुम्मा या जाम्ए अन्नास-ए-ले यौमिल्ला-रै-ब-फीह-ए-इज-म-धाल्लती पढ़ें, वस्तु मिल जाएगी।
88. अल-गनी (आत्म निर्भर)
जो व्यक्ति रोजाना 70 बार इसे पढ़े, वह धनी होगा और किसी का आश्रित न रहेगा। किसी आंतरिक या बाह्य रोग का रोगी अपने शरीर पर इसे पढ़कर फूंके तो वह रोग मुक्त होगा।
89. अल-मुगनी (धनी बनाने वाला)
जो व्यक्ति पहले व बाद में 11-11 बार दरूद शरीफ और 1111 बार इसे पढ़ेगा, वह धनी व स्वस्थ होगा। फज्र की नमाज के बाद या इशा की नमाज के बाद सूरत मुजम्मिल के साथ पढ़ें। जो व्यक्ति दस जुमे तक रोज एक हजार बार इसे पढ़े, वह किसी पर आश्रित न रहेगा। (इसे कुछ सूफियों ने 10 बार कहा है।)
90. अल-मान्ए (रोक देने वाला)
यदि पत्नी से झगड़ा हो तो बिस्तर पर लेटते समय इसे 20 बार पढ़ें, झगड़ा दूर हो जायेगा। आपस में प्रेम बढ़ेगा। अनगिनत बार पढ़ने से हर कष्ट से सुरक्षित होंगे और इच्छा की पूर्ति होगी।
91. अध-धार्र (हानि पहुंचाने वाला)
इसे जुमे की रात में सौ बार पढ़ने से सभी आपदाओं (मुसीबतों) से मुक्ति मिलती है।
92. अन-नाफए (लाभ देने वाला)
जो व्यक्ति कश्ती या सवारी में सवार होने के बाद इसे पढ़े वह सुरक्षित रहे। यदि कोई भी कार्य शुरू करने से पहले इसे 41 बार पढ़ा जाये, तो सारे कार्य इच्छानुसार पूर्ण होंगे। यदि पत्नी मिलन के समय पढ़ें, औलाद आज्ञाकारी और नेक होगा।
93. अन-नूर (प्रकाशवान)
जो व्यक्ति शुक्रवार की रात में सात बार सूरत नूर और एक हजार बार इसे पढ़े, उसका मन प्रकाश से भर जाए।
94. अल-हादी (सीधा रास्ता दिखाने वाला)
जो व्यक्ति हाथ उठाकर आकाश की ओर मुंह करके इसे पढ़े और मुंह पर हाथ फेरे उसे बेहतर मार्गदर्शन मिले। जो व्यक्ति 11 सौ बार या हादी ए हेदे नस्सि रातल मुस्तकीम इशा की नमाज के बाद पढ़ा करे, उसकी कोई इच्छा बाकी नहीं रहेगी।
95. अल-बदी (अद्वितीय वस्तुओं का आविष्कार करने वाला)
जिस व्यक्ति को कोई दुख या कष्ट आए, वह एक हजार बार या बदी-अस-समा-वात्-ऐ-वल्-अर्ध पढ़े, उसके कष्ट दूर होंगे। जो व्यक्ति 12 सौ बार 12 दिन तक या बदी-अल्-अजाइब्-ए-बिल्खैरे-या बदी पढ़े। उसकी इच्छा पूरा पढ़ने से पहले पूरी होगी।
96. अल-बाकी (सदैव शेष रहने वाला)
इसे जुमा की रात को इशा नमाज के बाद सौ बार पढ़ने से अल्लाह उसके सारे नेक कार्य अपना लेते हैं और वह हरेक प्रकार के कष्ट व हानि से सुरक्षित रहता है।
97. अल-वारिस (सबके बाद मौजूद रहने वाला)
सूरज निकलने के समय इसे सौ बार पढ़ने से हर दुख-दर्द से राहत मिलती है। जो व्यक्ति मगरिब व इशा के बीच एक हजार बार पढ़े, वह हर प्रकार की हैरानी व परेशानी से सुरक्षा पाए।
98. अर-रशीद (सत्यपथ का मार्गदर्शक)
जो व्यक्ति किसी कार्य या इच्छा की तरकीब न जाने, वह मगरिब और इशा के बीच इसे एक हजार बार पढ़े, ख्वाब में उसे तरकीब नजर आयेंगे और फिर वह तरकीब उसके जेहन में आ जायेगा। यदि रोजाना पढ़े तो सभी परेशानियां दूर होंगी।
99. अस्-सबूर (बहुत विनम्र)
जो व्यक्ति इसे सूर्योदय से पहले सौ बार पढ़े, वह उस दिन कष्ट से सुरक्षा पाए। दुश्मनों और ईष्यालुओं (हासिद) के मुंह बंद रहेंगे। जो व्यक्ति किसी दुख में हो, तो इसे 1020 पर पढ़े। उसके दुख दूर हो जायेंगे।

